भोपाल से कैलाश खेर का रिश्ता सिर्फ कार्यक्रमों तक सीमित नहीं है, यह रिश्ता आत्मा, संस्कृति और इंसानियत से जुड़ा है। भोपाल आगमन पर दैनिक भास्कर से बातचीत में पद्मश्री गायक कैलाश खेर ने भारत, समाज, राजनीति, संस्कृति, संगीत और चरित्र निर्माण पर खुलकर बात की। कैलाश खेर कहते हैं कि मध्यप्रदेश ही नहीं, भारत की हर वह धरती उन्हें प्रिय है, जहां अध्यात्म, कला, संस्कृति और मनुष्यता साथ-साथ चलती हो। “चंबल जैसे इलाकों में भी पुराने मंदिर मिलते हैं। इसका मतलब ये है कि बुरे कहे जाने वाले इलाकों में भी अच्छाई छुपी होती है, बस उसे उजागर करने वाला चाहिए। श्रेय प्रधानमंत्री जी को
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का जिक्र करते हुए कैलाश खेर कहते हैं कि बदलाव का श्रेय किसी एक व्यक्ति को नहीं दिया जा सकता, लेकिन यह भी सच है कि कोई न कोई ऐसा होता है जो समाज को जगाता है। “प्रधानमंत्री जब आए तो वो सिर्फ लकीर के फकीर बनकर नहीं आए। उन्होंने लक्ष्य रखा। पहले के प्रधानमंत्री भी अपने हिसाब से काम करते रहे होंगे, लेकिन अब एक दिशा दिखी है। कैलाश खेर के मुताबिक सबसे पहले योग, स्वच्छता और स्वास्थ्य जैसे बुनियादी विषयों से शुरुआत हुई और वहीं से बदलाव की नींव पड़ी। आज रेलवे स्टेशन सुधर रहे हैं, सफाई हो रही है, इंफ्रास्ट्रक्चर बन रहा है। भारत अब सिर्फ बोल नहीं रहा, कर भी रहा है। वे कहते हैं कि दुनिया आज भारत को मान रही है—खेल, विज्ञान और अंतरिक्ष हर क्षेत्र में। “इसरो नासा को पछाड़ रहा है, ये कोई छोटी बात नहीं है। यह उस नेतृत्व का परिणाम है जो देश को जगाता है, दिशा देता है। जागा हुआ ही दूसरों को जगा सकता है। पिछले 10–11 वर्षों में भारत में बदलाव
कैलाश खेर मानते हैं कि भारत पहले बहाने बनाकर, प्रिटेंशियस होकर जीता था, लेकिन अब धीरे-धीरे भीतर से चरित्र का निर्माण हो रहा है।“ऐसा नहीं है कि सब एकदम पवित्र हो गए हैं। करप्शन है, बेईमानी है, चरित्र हनन भी है, लेकिन अब वो कम हो रहा है। सड़कें अच्छी हो रही हैं, लोग कूड़ा सड़कों पर नहीं फेंक रहे, ट्रैफिक सेंस आ रहा है, तमीज बन रही है। उनका कहना है कि जैसे भारत में रोड, इंफ्रास्ट्रक्चर, रेलवे स्टेशन और एयरपोर्ट बन रहे हैं, वैसे ही समाज की तमीज भी बन रही है।“पहले मनुष्य गुरूर और घमंड में था, अब होश में आ रहा है। को-एक्जिस्टिंग की पद्धति पर जीना सीख रहा है। दुनिया भारत के गुण गा रही
कैलाश खेर कहते हैं कि पिछले दस-ग्यारह वर्षों में इतना बदलाव आया है कि आज भारत के गुण पूरी दुनिया गा रही है। आज विश्व वंदे मातरम गा रहा है। दूसरी भाषा, दूसरी वेशभूषा, दूसरी त्वचा के लोग भारत को नमस्कार कह रहे हैं। वह यह भी जोड़ते हैं कि भारत में बनने वाले प्रोडक्ट्स में अभी और ईमानदारी आने की जरूरत है। विश्व गुरु बनने की बात तब सार्थक होगी जब चरित्र भी बने।” पहले रोड नहीं थे, आज दुनिया मान रही है
कैलाश खेर कहते हैं कि एक समय भारत की स्थिति ऐसी थी कि बुनियादी सुविधाएं भी नहीं थीं, लेकिन आज हालात तेजी से बदले हैं।“खेल में हम तोड़ रहे हैं, साइंस में हम तोड़ रहे हैं। नासा को इसरो ने पछाड़ दिया। और क्या चाहिए? वह उदाहरण देते हैं कि भारतीय एस्ट्रोनॉट शुभांशु शुक्ला को अशोक चक्र मिला—यह नए भारत के नौनिहाल हैं। पहले भी भारत ने हीरे जन्मे, लेकिन कौन जानता था? हर क्षेत्र में लोगों को दबा दिया जाता था। राजा जी एक होंगे, बाकी सब प्रजा। गुलामी की मानसिकता और दगाबाजों की भरमार
कैलाश खेर खुलकर कहते हैं कि भारत में लंबे समय तक गुलामी की मानसिकता रही। गुलाम आदमी दगा देता है। हमारे देश में दगाबाजों की बाढ़ रही है। जो पहले दो कौड़ी के थे, चापलूसी करके अमीर हो गए। उनके मुताबिक बेईमानी किसी एक व्यक्ति तक सीमित नहीं होती, यह एक प्रवृत्ति होती है।“अब धीरे-धीरे बेईमानों पर से पर्दा उठ रहा है और चरित्रवान लोगों को आगे लाया जा रहा है। पद्म अवॉर्ड और गुमनाम नायक
कैलाश खेर पद्म अवॉर्ड की बदलती सोच की भी तारीफ करते हैं। आज पद्म अवॉर्ड ऐसे लोगों को मिल रहा है जिनका नाम किसी ने सुना भी नहीं था—कोई पर्यावरण के लिए जीवन खपा गया, कोई चाइल्ड ट्रैफिकिंग के खिलाफ। वे बताते हैं कि ऐसे लोगों से मिलकर आंखें नम हो जाती हैं। “यही चरित्र जागरण है भारत का।” ‘तेरी दीवानी’ मनोरंजन नहीं, साधना है
अपने मशहूर गीत ‘तेरी दीवानी’ पर कैलाश खेर कहते हैं कि यह मनोरंजन का गीत नहीं है। अगर संत भी गाने लगें, सत्संग हो जाए, संकीर्तन हो जाए, तो समझिए वो गाना मनोरंजन का नहीं है। वे फिल्मी संगीत से इतर नॉन-फिल्म और लोक संगीत पर जोर देते हैं।“फिल्में नई हैं, भारत हजारों साल पुराना है। जब फिल्में नहीं थीं, तब भी इल्म था।” सोशल मीडिया से दूरी
सोशल मीडिया पर सिंगर्स की बाढ़ के सवाल पर कैलाश खेर साफ कहते हैं कि जो आप देख रहे हैं, वो मैं नहीं देख रहा। मैं आज भी शास्त्रीय और लोक संगीत सुनता हूं। उनके मुताबिक भारत आज भी स्वर्ण युग में जी रहा है।“हमारी धरती ने इतना ज्ञान दिया है कि हजारों साल का रिसर्च मटेरियल मौजूद है, बस हम खुद देखना शुरू करें।


