कैसे करते हैं डिजिटल अरेस्ट, VIDEO:कर्मचारी नेता से कहा- तुम्हारे बेटे ने रेप किया; उधर रोते हुए बेटा बोला-बचा लो पापा

इन दिनों “डिजिटल अरेस्ट” के नाम पर ठगी के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। ठग अलग-अलग तरीके अपनाकर लोगों को धमकाते हैं और उन्हें डराकर अपनी मांगें मनवाने की कोशिश करते हैं। ऐसा ही एक मामला कर्मचारी नेता रमेश राठौर के साथ हुआ। रमेश राठौर को एक कॉल आया, जिसमें ठगों ने दावा किया कि उनके बेटे ने रेप किया है और उसे गिरफ्तार कर लिया गया है। ठगों ने कहा, “तुम चार लाख रुपए दो, तो तुम्हारे बेटे को छोड़ देंगे। बाहर मीडिया खड़ी है, और अगर पैसे नहीं दिए, तो बेटा पच्चीस साल के लिए जेल चला जाएगा।”फोन पर एक आवाज उनके बेटे की तरह बोल रही थी, “पापा, मुझे बचा लो, ये लोग मुझे मार रहे हैं।” लेकिन रमेश, पहले से सतर्क थे और जानते थे कि “डिजिटल अरेस्ट” जैसी कोई कानूनी प्रक्रिया नहीं होती। जब उन्होंने ठगों से गहन पूछताछ शुरू की, तो ठगों को शक हुआ और उन्होंने कॉल काट दिया। इसी तरह का एक और मामला जॉनसन एंड जॉनसन कंपनी में काम करने वाले हिमांशु भावसर के साथ सामने आया। गुरुवार सुबह उन्हें भी ऐसा ही एक कॉल आया, लेकिन ठग इसमें भी असफल रहे। रमेश राठौर ने बताया कि बुधवार शाम उन्हें 3141457118 नंबर से कॉल आया। फोन करने वाले ने कहा, “आपका बेटा बेंगलुरु में है और हमने उसे रेप केस में गिरफ्तार किया है।” जब रमेश ने पूछा कि उन्हें क्या करना होगा, तो ठगों ने चार लाख रुपए की मांग की। मनोज के सतर्क सवालों से ठग परेशान हो गए और फोन काट दिया। नहीं लगा 1930 नंबर
रमेश कहते हैं कि घटना के तुरंत बाद मैं डिपो चौराहे पर स्थित साइबर कार्यालय पहुंचा, जहां पर मुझे बताया कि आपके साथ फ्रॉड नहीं हुआ है, तब मुझे बताया कि 1930 पर मैं शिकायत कर दू, मगर मैंने काफी देर तक वहीं खड़े होकर कॉल किया मगर उनका कॉल नहीं लगा। जिसके बाद मैं अब शुक्रवार को साइबर कार्यालय में लिखित में आवेदन दूंगा। वीडियो कॉल पर बयान भोपाल के हिमांशु भवसार, जो जॉनसन एंड जॉनसन कंपनी में काम करते हैं, ने बताया कि गुरुवार सुबह उन्हें एक कॉल आई। कॉल करने वाले ने दावा किया कि उनके नाम से दिल्ली में पचास से अधिक सिम कार्ड खरीदी गई हैं, जो लड़कियों के साथ गंदे मजाक और गलत संदेश भेजने के लिए इस्तेमाल हो रही थीं। ठग ने हिमांशु से अपनी सिम को बंद करने और एफआईआर दर्ज करवाने के लिए कहा। इसके बाद, एक युवक जो पुलिस की वर्दी में था, ने हिमांशु से वीडियो कॉल पर स्टेटमेंट देने को कहा। उसने समझाया कि वह वीडियो कॉल पर रहेगा और पुलिस का अधिकारी ऑडियो कॉल पर रहेगा। कहा कि कोई बात नहीं छुपानी है, और सब कुछ सच-सच बताना है। हिमांशु ने बताया कि उन्होंने इस कॉल को दूसरे फोन से रिकॉर्ड कर लिया। लेकिन जब उन्होंने अधिक सवाल पूछे, तो ठग गालियाँ देते हुए कॉल काटकर भाग गए। डिजिटल अरेस्ट “डिजिटल अरेस्ट” एक प्रकार की साइबर ठगी है, जो लोगों को डराकर उनसे पैसे वसूलने का तरीका है। इस शब्द का कानूनी आधार नहीं है और यह एक घोटाला है। ठग खुद को कानून प्रवर्तन एजेंसी के अधिकारी बताकर पीड़ितों को यह विश्वास दिलाते हैं कि वे किसी अपराध में फंसे हुए हैं और तत्काल पैसे देने की धमकी देते हैं, ताकि उन्हें गिरफ्तार न किया जाए। यह ठगी का एक नया और खतरनाक तरीका है, जिसमें धोखेबाज मानसिक दबाव डालकर लोगों को शिकार बनाते हैं। डिजिटल अरेस्ट से बचने के लिए, इन बातों का ध्यान रखें जब साइबर अपराधियों के सामने आ गई असली पुलिस भोपाल में दुबई के बिजनेसमैन को साइबर क्रिमिनल ने खुद को पुलिस बताकर 7 घंटे तक डिजिटल हाउस अरेस्ट कर रखा था। दोनों आरोपी उससे पैसे ऐंठ पाते, इतने में कारोबारी के कमरे में सीधे साइबर पुलिस आ गई। वीडियो कॉल के जरिए कारोबारी को डिजिटल अरेस्ट किए दोनों फ्रॉड असली पुलिस को देखकर पहले तो सक-पका गए, फिर कहने लगे, ‘यह सीबीआई की कार्रवाई है, आप हमें जानते नहीं हैं, बीच में नहीं आइए। पढ़ें पूरी खबर

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