कैसे पोषित हों नौनिहाल:जिले के 367 आंगनबाड़ी केंद्रों पर पानी 554 पर बिजली ही नहीं, घर से पोषाहार लाकर खिला रहीं कार्यकर्ता

भरतपुर महिला एवं बाल विकास विभाग की अनदेखी का खामियाजा जिले के 1,246 आंगनबाड़ी केंद्रों में पढ़ने वाले हजारों मासूम बच्चे भुगत रहे हैं। गर्मी चरम पर है, लेकिन 367 आंगनबाड़ी केंद्र ऐसे हैं जहां आज तक पेयजल की व्यवस्था नहीं हो सकी। हालात इतने खराब हैं कि कार्यकर्ता पोषाहार बनाने के लिए केंद्र की बजाय अपने घरों पर खाना बनाती हैं और फिर बच्चों को लाकर खिलाती हैं। केंद्रों पर न पानी है, न खाना पकाने की स्थिति। जबकि विभाग की ओर से गैस सिलेंडर, चूल्हा और बर्तन उपलब्ध कराए गए हैं। इन बर्तनों की खरीद पर करीब 56 लाख रुपये खर्च किए गए, लेकिन जिन 367 केंद्रों पर पानी नहीं है वहां ये सब सिर्फ शोपीस बनकर रह गए हैं। इतना ही नहीं, जिले के 554 आंगनबाड़ी केंद्र अब तक बिजली से वंचित हैं। ऐसे में पंखे नहीं चलते और बच्चे तपती दोपहरी में पसीने से लथपथ होकर पढ़ाई और पोषण की बजाय बेचैनी में समय काटते हैं। कार्यकर्ता और सहायिकाएं भी इस भीषण गर्मी में बिना सुविधा के काम कर रही हैं। पोषण और प्रारंभिक शिक्षा के लिए चलाई जा रही योजना में यदि मूलभूत सुविधाएं ही न हों, तो इसका असर सीधे बच्चों की सेहत और हाजिरी पर पड़ता है। इसके बावजूद विभाग की ओर से किसी ठोस पहल के संकेत नहीं हैं। लोगों और कार्यकर्ताओं की मांग है कि विभाग तत्काल प्रभाव से पेयजल और विद्युत जैसी आवश्यक सुविधाएं सुनिश्चित करे, ताकि योजना का लाभ वास्तव में जमीनी स्तर तक पहुंचे। शहर के रेलवे आंगनबाड़ी केंद्र की हालत इतनी खराब है कि वहां मूलभूत सुविधाओं का भी अभाव है। न तो पानी की कोई व्यवस्था है और न ही बिजली का कनेक्शन। बिजली की भी सुविधा नहीं है। जिससे बच्चे और कार्यकर्ता दोनों परेशान रहते हैं। केंद्र पर कार्यरत भारती बताती हैं, “यहां न पीने का पानी है, न खाना बनाने की सुविधा। पोषाहार के लिए घर से ही खाना बनाकर लाना पड़ता है। बर्तन और गैस विभाग ने भेजे हैं, लेकिन बिना पानी के इस्तेमाल कैसे करें?” टोंटपुर गांव का आंगनबाड़ी केंद्र बुनियादी सुविधाओं के नाम पर पूरी तरह खाली है। यहां न पीने के लिए पानी है और न ही बिजली की व्यवस्था। जिससे दोपहर के समय वहां खड़ा रहना भी मुश्किल हो जाता है। कार्यकर्ता व सहायिका बताती है कि केंद्र पर न तो कोई नल है, न हैंडपंप। मजबूरी में घर से पीने और काम के लिए पानी लेकर आती हूं। बिजली नहीं होने से बच्चों को गर्मी में छत के नीचे बैठना पड़ता है, जिससे कई बार उन्हें चक्कर आने जैसी स्थिति उत्पन्न हो जाती है। हमें गैस सिलेंडर और बर्तन दिए हैं, लेकिन जब पानी और बिजली ही नहीं है तो उनका उपयोग कैसे करें?” “पेयजल की व्यवस्था के लिए सार्वजनिक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग को पत्र लिखा गया है। जहां विभागीय भवन हैं, वहां बिजली कनेक्शन कराए जा चुके हैं। इसके अलावा जिन आंगनबाड़ी केंद्रों का संचालन सरकारी स्कूलों में हो रहा है।” -सिकरामाराम चोयल, उपनिदेशक, महिला एवं बाल विकास विभाग, भरतपुर

FacebookMastodonEmail

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *