इंदौर में शनिवार को यूरोलॉजी की इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस USICON-2026 के दौरान महिला डॉ. त्सेरिंग (डोमा) भूटिया की प्रेजेंटेशन के दौरान तबियत बिगड़ी थी और वे गिर गई थीं। चार दिन तक चले इलाज के बाद उनकी आज तड़के मौत हो गई। डॉक्टरों के मुताबिक उन्हें ब्रेन में एनुरिज्म की तकलीफ थी जिसके चलते वह वेंटिलेटर पर थीं। घटना वाले दिन की दोपहर मौके पर मौजूद डॉक्टरों और डेलिगेट्स ने उन्हें तुरंत सीपीआर दिया। इसके बाद उन्हें लाइफ केयर हॉस्पिटल ले जाया गया था। फिर शाम उन्हें अपोलो हॉस्पिटल में रैफर किया गया था। यहां इन्वेस्टिगेशन में पता चला कि उन्हें पहले से ही ब्रेन में एनुरिज्म की तकलीफ थी। यह ब्रेन की नस का कमजोर हिस्सा होता है, जो अचानक फटने पर तेज ब्लीडिंग का कारण बनता है। तब ब्रेन की नस अचानक फट गई। उसी वजह से वे बेहोश हो गई थीं। सोमवार को उनकी नाजुक स्थिति को देखते हुए उन्हें मुंबई के मेदांता हॉस्पिटल रैफर करने के लिए एयर लिफ्ट किया जाना था। फिर परिजन के कहने पर उन्हें इंदौर के ही मेंदाता हॉस्पिटल में रैफर किया था जहां आज तड़के उनकी मौत हो गई। वह मूलत: सिक्किम की रहने वाली थीं। श्रीन का परिवार बुद्धिज्म समाज से है। इसके चलते उनका शव एमजीएम मेडिकल कॉलेज भेजा गया है। यहां एम्बाल्मिंग प्रोसेस (शव को संरक्षित कर दूर भेजने के लिए) की जा रही है। कुछ घंटों की प्रोसेस के बाद उनका शव सिक्किम रवाना किया जाएगा।


