सरकारी मेडिकल कॉलेज (जीएमसी) जिस तरीके से विश्व विख्यात है उसी तरह से बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी (बीएचयू) भी अपना सानी नहीं रखता। कमोबेश, हार्ट के मरीजों के इलाज के मामले में दोनों ही बेजोड़ हैं। फिलहाल दोनों ही समय-समय पर अपने-अपने माहिरों से एक दूसरे के यहां इलाज की तकनीक शेयर करते हैं। इसी कड़ी के तहत जीएमसी के कॉर्डियोलॉजिस्ट डॉ. परमिंदर िसंह मंगेड़ा ने विशेष आमंत्रण पर वहां के हार्ट स्पेशलिस्टों को बिना चीड़-फाड़ के इलाज के गुर सिखाए। इसके लिए उनके समक्ष 4 मरीज लाए गए थे जो बेहद ही गंभीर अवस्था में थे। फिलहाल उन्होंने वहां के माहिरों के साथ मिलकर उनका सफल इलाज किया। डॉ. परमिंदर ने बताया कि 13 जनवरी तक सर्दियों की छुट्टियां थीं और इसी दौरान बीएचयू के इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस के कार्डियोलाजी विभाग से जीएमसी को मेल आई। मेल में 3 जनवरी को प्रॉक्टर कॉम्प्लेक्स स्ट्रक्चरल हार्ट और पीडियाट्रिक्स कार्डिक इंटरवेंशन पर प्रोक्टरशिप के लिए माहिर भेजने के बारे में लिखा था। वह बताते हैं कि प्रिंसिपल डॉ. राजीव देवगन ने इसे उपलब्धि मानते हुए उनको जाने के लिए प्रेरित किया और वह पहुंच गए। डॉ. परमिंदर ने बताया कि वहां प उनके सामने 5 केस रखे गए। चूंकि समय कम था नतीजतन उन्होंने 4 का इलाज किया। उन मरीजों में दो के हॉर्ट में छेद था, जबकि एक के हॉर्ट का एक हिस्सा फट गया था नतीजतन खून रिस कर दूसरे हिस्से में जा रहा था। जबकि चौथे मरीज के हॉर्ट की मुख्य नस (धमनी) सिकुड़ी हुई थी। डॉ. परमिंदर मेडिकल कॉलेज में असिस्टेंट प्रोफेसर हैं। साल 2011 में एमबीबीएस करने के बाद उन्होंने साल 2015 में एमडी पास आउट किया फिर 2018 में हार्ट आधारित डीएम किया। इसके बाद मेडिकल कॉलेज में लगे। तीन सालों के अपने कार्यकाल में उन्होंने 2,500 मरीजों के हॉर्ट की बिना चीड़-फाड़ के इलाज किया। इन मरीजों में 6 महीने से 12 साल तक के बच्चे भी शामिल हैं। डॉ. परमिंदर ने ल्यूटम्बाकर सिंड्रॉम बीमारी का केस हल किया है। अपने यहां उन्होंने उक्त बीमारी पीड़ित महिला का इलाज किया, जो पूरी दुनिया का 24वां, देश का 6वां और पंजाब का पहला केस था।


