मप्र शासन को सरकारी जमीन (माफी औकाफ) के स्वामित्व से जुड़े मामले में बड़ी जीत मिली है। न्यायाधीश अशोक कुमार त्रिपाठी ने कलेक्टर के दावे को स्वीकार करते हुए जमीन को माफी औकाफ की माना। इसके परिणामस्वरूप फालका बाजार स्थित सर्वे क्रमांक-795 की 795 वर्गमीटर भूमि (8557 वर्ग) के संबंध में हुई खरीद को न्यायालय ने विधि विरुद्ध माना और विक्रय पंजीयन को शून्य व निष्प्रभावी घोषित किया। सरकारी वकील मिनी शर्मा ने बताया-फालका बाजार स्थित रामजानकी मंदिर जरी पटका नंबर-2 स्थित संपत्ति का मामला है। यह मंदिर माफी औकाफ विभाग की है। शासकीय दस्तावेज में संपत्ति रामजानकी मंदिर के रूप में दर्ज है। ये भी दावा किया कि ये जमीन सर्वे क्रमांक-733 स्थित 5.40 हेक्टेयर का हिस्सा है। मौके पर उक्त संपत्ति में अनेक देवी-देवताओं की मूर्तियां हैं। 2018 में शासन ने दावा पेश किया। बताया कि तत्कालीन महंत मदनलाल शर्मा ने पूर्व महंत रामचरण दास से एक फर्जी वसीयतनामा अपने हक में तैयार कराया। गलत तरीके से निगम के रिकॉर्ड में हेर-फेर कर मंदिर संपत्ति की जगह रिकॉर्ड में अपना नामांतरण करा लिया। महंत मदनलाल के निधन के बाद उनकी प|ी सीता देवी ने निगम में सांठ-गांठ कर सर्वे क्रमांक 733 में अपना नामांतरण करा लिया। जबकि नगर निगम ग्वालियर के संपत्ति कर रिकॉर्ड में सन 1930 से लेकर1975 तक रामजानकी मंदिर और महंत रामचरण का नाम इंद्राज रहा है। सरकारी वकील विजय शर्मा दिलचस्पी नहीं ले रहे ग्वालियर के तत्कालीन कलेक्टर अक्षय कुमार सिंह ने न्यायालय को पत्र लिखा। 2023 में लिखे पत्र में बताया कि सरकारी वकील विजय शर्मा इस केस में दिलचस्पी नहीं ले रहे। अपनी बात की पुष्टि के लिए तहसीलदार श्यामू श्रीवास्तव के पत्र का हवाला दिया। इसी के चलते इस केस में पैरवी का जिम्मा अन्य सरकारी वकील को दिया गया। ये भी बता दें कि इस केस में मध्यस्थता का प्रयास किया गया था, जो विफल रहा था।


