प्रदेश में संपत्ति दस्तावेजों के रजिस्ट्रेशन में राज्य सरकार ने बड़ा बदलाव किया है। नए प्रावधानों के अनुसार, अब सोसायटी पट्टों पर जमीन की रजिस्ट्री नहीं हो सकेगी। यानी आवासीय कॉलोनियों के भूखंडों की रजिस्ट्री के लिए अब भू-रूपांतरण (90 ए) कराना जरूरी होगा। यह आदेश तत्काल प्रभाव से लागू हो गए हैं। ऐसे में अब सोसायटी पट्टों पर भूखंडों की खरीद-फरोख्त करने पर सोसायटी से नाम ट्रांसफर करवाना होगा। हालांकि, पुराने पट्टों पर कोई असर नहीं होगा। सोसायटी पट्टों पर कटने वाली नई कॉलोनियों पर पूरी तरह रोक रहेगी। सरकार ने रजिस्ट्रेशन (राजस्थान अमेंडमेंट) एक्ट-2021 की सभी धाराओं को प्रभावी कर दिया है। दूसरी ओर, फैसले के साथ ही पंजीयन-मुद्रांक से जुड़े वकीलों ने विरोध शुरू कर दिया है। बुधवार को डीआईजी-स्टांप प्रथम को कानून वापस लेने का ज्ञापन सौंपा है। साथ ही, गुरुवार से अनिश्चितकालीन कार्यबंदी का ऐलान किया है। इधर, बैंकों और वित्तीय संस्थानों के लिए भी निदेशक हैं कि ऐसी संपत्ति पर बने इक्विटेबल मॉर्गेज की प्रति रजिस्ट्री कार्यालय को भेजनी होगी। पालन न करने पर 25 हजार रुपये जुर्माना लगेगा। भास्कर इनसाइट सोसाइटियां करेंगी पट्टा ट्रांसफर का अवैध कारोबार 1 हाउसिंग सोसाइटियां समानांतर सब-रजिस्ट्रार दफ्तर की तरह काम करती हैं। सोसाइटी की कॉलोनी में भूखंड खरीदने वाले रजिस्ट्री नहीं करवाते, वो सोसाइटी दफ्तर से पट्टा ट्रांसफर करवा लेते हैं। सोसाइटियां इसके बदले 200 से 800 रुपए प्रति गज शुल्क वसूलती हैं। जानकारी के बाद भी इन पर पाबंदी नहीं लगाई गई। जबकि सोसाइटियों के पट्टा ट्रांसफर को चैन दस्तावेज मानते हुए जेडीए पट्टा भी देता है। 2 हाउसिंग सोसाइटियों द्वारा कृषि भूमि पर बैकडेट में पट्टे बना कर कॉलोनियां बसाई जा रही है। विकास प्राधिकरणों व निगम की ओर से इन कॉलोनियों व भूखंडों पर तोड़फोड़ की कार्यवाही की जाती है, लेकिन सोसाइटियों के खिलाफ कार्यवाही नहीं की जाती। ऑडिट नहीं होने से ब्लैकलिस्ट वाली सोसाइटियां भी सन 2000 से पहले की तारीख में पट्टे दे रही है। जयपुर की 80 प्रतिशत बसावट सोसायटी पट्टों पर पंजीयन मुद्रांक कार्य से जुड़े एडवोकेट गजराज सिंह, सुनील शर्मा और अखिलेश जोशी का कहना है कि जयपुर की 80% बसावट सोसायटी पट्टों पर हुई है। अब तक कई सोसायटियों ने जेडीए से 90-ए नहीं करवाया है। ऐसे में हजारों परिवारों के सामने खुद के भूखंड साबित करने का संकट खड़ा हो गया। उन्हें मकान बनाने के लिए बैंक लोन तक नहीं देंगे। सरकार ने सोसायटी के पट्टे जारी करने पर वर्ष 1997 में रोक लगा दी। लेकिन अब भी 100 से ज्यादा सोसायटियां पुराने तारीखों में पट्टे जारी कर रही हैं। जयपुर में 450 से ज्यादा सोसायटियों के अब तक रिकॉर्ड जमा नहीं हैं, उनकी ऑडिट तक नहीं हो पाई। सोसायटियों पर पूर्ण प्रतिबंध के बाद ही इस कानून को लागू करना चाहिए था। पावर ऑफ अटॉर्नी, किराएनामे का रजिस्ट्रेशन जरूरी राज्य सरकार ने दस्तावेजी प्रक्रिया को और अधिक पारदर्शी एवं सुरक्षित बनाने की दिशा में कदम बढ़ाया है। नए नियमों के तहत अब केवल स्टाम्प पेपर या नोटरी करवाकर बनाए गए मुख्यारनामा, किरायानामा, एग्रीमेंट और सेल सर्टिफिकेट मान्य नहीं माने जाएंगे। इन सभी दस्तावेजों का पंजीयन कराना अनिवार्य कर दिया गया है। सरकार का मानना है कि बिना पंजीयन के तैयार किए जा रहे दस्तावेज अक्सर विवादों, धोखाधड़ी और संपत्ति संबंधी गड़बडिय़ों का कारण बनते हैं। ऐसे मामलों को रोकने और भूमि व संपत्ति रिकॉर्ड को सुदृढ़ करने के लिए यह बदलाव व्यापक असर डालेगा। नए नियम लागू होने के बाद अब किसी भी प्रकार का मुख्यारनामा, किराया समझौता या एग्रीमेंट तभी वैध माना जाएगा, जब वह विधिवत पंजीकृत हो। इससे राजस्व बढ़ेगा और लेन-देन की प्रक्रिया अधिक सुरक्षित और कानूनी रूप से अनिवार्य हो जाएगी।


