कोंडागांव ने बस्तर ओलंपिक में जीते 51 पदक:16 गोल्ड, 14 सिल्वर और 21 ब्रॉन्ज मेडल, कृतिका और सुशीला बनीं यूथ आइकन

जगदलपुर में 11 से 13 दिसंबर 2024 तक आयोजित संभाग स्तरीय बस्तर ओलंपिक में कोन्डागांव जिले ने कुल 51 पदक जीतकर शानदार प्रदर्शन किया। इस प्रतियोगिता के समापन समारोह में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने विजेताओं को सम्मानित किया। जिले की कृतिका मरकाम और सुशीला नेताम को उनके उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए ‘यूथ आइकन’ घोषित किया गया। वरिष्ठ खेल अधिकारी के अनुसार, कोन्डागांव जिले के खिलाड़ियों ने 16 स्वर्ण, 14 रजत और 21 कांस्य पदक सहित कुल 51 पदक हासिल किए। यह जिले के लिए एक बड़ी उपलब्धि है, जो खिलाड़ियों की कड़ी मेहनत और प्रतिभा को दर्शाता है। संभाग स्तरीय प्रतियोगिता में भाग लेने वाली सुशीला नेताम ने तीरंदाजी (आर्चरी) की 50 मीटर और 30 मीटर स्पर्धाओं में स्वर्ण पदक जीता। उन्होंने पहले जिला स्तरीय बस्तर ओलंपिक में प्रथम स्थान प्राप्त किया था और राष्ट्रीय खेलों में भी तीसरा स्थान हासिल कर चुकी हैं। इसी तरह, माकड़ी विकासखंड के ग्राम पीढ़ापाल की कृतिका मरकाम ने एथलेटिक्स के जूनियर वर्ग में अपना दम दिखाया। उन्होंने 100 मीटर, 200 मीटर और 4×100 रिले प्रतियोगिता में छह जिलों के खिलाड़ियों के साथ मुकाबला करते हुए तीनों श्रेणियों में प्रथम स्थान प्राप्त किया। कृतिका पिछले तीन वर्षों से खेल रही हैं। बस्तर ओलंपिक का आयोजन जिले के दूरस्थ अंचलों की खेल प्रतिभाओं को एक मंच प्रदान कर रहा है। यह खिलाड़ियों को अपनी क्षमताएं प्रदर्शित करने और राष्ट्रीय तथा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आगे बढ़ने के अवसर भी उपलब्ध करा रहा है। आदिवासी संस्कृति के लिए विश्वप्रसिद्ध है बस्तर बस्तर अपनी विशिष्ट आदिवासी पहचान, समृद्ध संस्कृति और जीवंत परंपराओं के लिए विश्वभर में प्रसिद्ध है। वर्तमान में इजराइल से आए चार पर्यटक बस्तर का दौरा कर रहे हैं, जो यहां की कला, संस्कृति और पारंपरिक ज्ञान प्रणालियों से काफी प्रभावित हैं। शिल्प ग्रामों का किया भ्रमण इन पर्यटकों ने बस्तर के प्रमुख शिल्प केंद्रों कोंडागांव, कुम्हारपारा, बुनागांव, नारायणपुर और गढ़बेंगाल का दौरा किया। यहां उन्होंने प्रसिद्ध घड़वा शिल्प, लौह शिल्प और मृदा शिल्प को नजदीक से देखा और समझा। पर्यटकों ने शिल्प निर्माण की पारंपरिक विधियों, औजारों और सांस्कृतिक प्रतीकों में विशेष रुचि दिखाई। कारीगरों की कलाकृतियों की खरीदारी इस दौरान पर्यटकों ने स्थानीय कारीगरों की बनाई गई कलाकृतियों की खरीदारी भी की, जिससे कारीगरों को आर्थिक लाभ मिला। हाट-बाजार और स्थानीय खान-पान बना आकर्षण शिल्प ग्रामों के साथ-साथ स्थानीय हाट-बाज़ार भी पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र रहे। यहां उन्होंने पारंपरिक हस्तनिर्मित वस्तुओं, वन-आधारित उत्पादों और स्थानीय खान-पान का अनुभव किया। पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों में दिखाई जिज्ञासा पर्यटकों ने बस्तर की पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों में भी विशेष रुचि दिखाई। खास तौर पर सिरहा-गुनिया की उपचार पद्धति, जड़ी-बूटियों का उपयोग और आध्यात्मिक व सामाजिक विश्वासों पर आधारित उपचार प्रणाली ने उन्हें आकर्षित किया। योग शिक्षिका तहाली हुईं विशेष रूप से प्रभावित इन पर्यटकों में इजराइल की योग शिक्षिका तहाली भी शामिल हैं, जो बस्तर की पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों, प्राकृतिक जीवन-शैली और आध्यात्मिक दृष्टिकोण से विशेष रूप से प्रभावित हैं। उन्होंने योग और आदिवासी उपचार पद्धतियों के बीच समानता तथा समग्र स्वास्थ्य की अवधारणा को समझने में गहरी रुचि व्यक्त की। 10 दिवसीय बस्तर भ्रमण पर हैं विदेशी पर्यटक बस्तर ट्राइबल होमस्टे के संचालक शकील रिजवी ने बताया कि इजराइल से आए पर्यटक तहाली, एनत, रोन और बोआज़ 10 दिवसीय बस्तर भ्रमण पर हैं। उनके अनुसार, पर्यटक बस्तर की कला, संस्कृति, लोक-चिकित्सा, खान-पान और पारंपरिक जीवन-शैली को केवल देख ही नहीं रहे, बल्कि उसे गहराई से अनुभव भी कर रहे हैं। 2006 से संचालित है बस्तर ट्राइबल होमस्टे ​​​​​​​रिजवी ने बताया कि बस्तर ट्राइबल होमस्टे वर्ष 2006 से देसी और विदेशी पर्यटकों को ठहरने की सुविधा दे रहा है। इसका मुख्य उद्देश्य स्थानीय आदिवासी समुदाय को पर्यटन से जोड़कर उनकी संस्कृति, परंपराओं और आजीविका को सशक्त बनाना है।

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