छत्तीसगढ़ के कोंडागांव जिले में सल्फीपदर गांव के लोगों ने जंगल संरक्षण की एक अनूठी मिसाल पेश की है। गांव के 72 परिवारों ने पिछले 7 सालों से 100 एकड़ जंगल की सुरक्षा का बीड़ा उठाया है। इन ग्रामीणों की जंगल बचाने की मुहिम को देखते हुए प्रशासन भी अब उनकी मदद कर रहा है। जब वन विभाग से जंगल की सुरक्षा की जिम्मेदारी नहीं मिली, तो ग्रामीण 3 दिन तक राजधानी में डटे रहे। वे तत्कालीन राज्यपाल अनुसुइया उइके से मिलने की कोशिश करते रहे। ग्रामीणों के इस जज्बे को देखकर राज्यपाल खुद उनके गांव पहुंचीं। उन्होंने ग्रामीणों के जंगल प्रेम से प्रभावित होकर पूरे गांव को गोद लेने की घोषणा की। उद्यान विभाग के अधिकारी लोकेश्वर प्रसाद के अनुसार, यह गांव पूरे प्रदेश के लिए एक मिसाल बन गया है। यहां के पुरुष, महिलाएं और बच्चे बिना किसी स्वार्थ के जंगल की रक्षा कर रहे हैं। प्रशासन अब इन्हीं जंगलों से ग्रामीणों की आमदनी बढ़ाने की योजना बना रहा है। साल के पेड़ों पर काली मिर्च की खेती शुरू की गई है। यह पहल ग्रामीणों के आर्थिक विकास में मददगार साबित होगी। इस तरह सल्फीपदर के लोगों ने जंगल संरक्षण के साथ-साथ आजीविका का भी बेहतर मॉडल तैयार किया है।


