कोंडागांव में 11 जनवरी को वन मंडलाधिकारी, वन अमले और वन समितियों ने वनों को बचाने की शपथ ली। यह पहल बस्तर के जल, जंगल और जमीन को संरक्षित करने के उद्देश्य से की गई है। कोंडागांव वन मंडलाधिकारी चुणामणि सिंह ने वनों के अस्तित्व पर मंडराते खतरे को देखते हुए यह मुहिम शुरू की है। इसके तहत लगातार बड़े सम्मेलनों का आयोजन किया जा रहा है, जिनमें ग्रामीण, वन समितियां और वन विभाग के कर्मचारी शामिल हो रहे हैं। इन सम्मेलनों में सभी जंगल बचाने और उनकी पहरेदारी करने की शपथ ले रहे हैं। दरअसल, बीते कुछ समय से वन क्षेत्रों में तेजी से कमी और अवैध कटाई के बढ़ते मामलों ने ग्रामीणों और वन विभाग दोनों को चिंतित कर दिया था। जंगलों के विनाश को रोकने के लिए समाधान खोजना एक गंभीर चुनौती बन गई थी। बस्तर में नक्सलवाद की समस्या अब समाप्ति की ओर है, जिसके कारण वनों के संरक्षण की चिंता और बढ़ गई है। प्रशासन और ग्रामीणों के बीच पहले नक्सलवाद एक बड़ी बाधा था। वन विभाग केवल वनों को बचाने तक ही सीमित नहीं है, बल्कि इससे होने वाली आय का एक बड़ा हिस्सा ग्रामीणों के विकास में लगाने की योजना भी बना रहा है। जंगल से प्राप्त वनोपज से ग्रामीणों को लाभ होगा। इसके अतिरिक्त, वन विभाग कुछ उद्योग स्थापित करने पर भी विचार कर रहा है, जिससे ग्रामीण युवाओं को रोजगार मिल सके और उनकी आर्थिक स्थिति में सुधार हो।


