छत्तीसगढ़ के कोंडागांव में जापानी इंसेफेलाइटिस नामक नए वायरस की पुष्टि हुई है। जिले के कई गांव में ये वायरस सूअर में पाया गया है, जिसके बाद कलेक्टर कुणाल दुदावत ने तत्काल कार्रवाई के आदेश दिए हैं। राज्य रोग अन्वेषण प्रयोगशाला की रिपोर्ट के मुताबिक, पाला गांव में 13 सूअरों में ये खतरनाक वायरस मिला है। जिसके बाद पशुपालन विभाग की टीमें गांव में घर-घर जाकर सूअर पालकों को जागरूक कर रही हैं। जापानी इंसेफेलाइटिस कैसे फैलता है? पशुपालन विभाग की टीम ने बताया कि यह वायरस मुख्य रूप से मच्छरों के माध्यम से फैलता है, विशेष रूप से संक्रमित क्यूलेक्स प्रजाति के मच्छरों के काटने से फैलता है। आमतौर पर ये उन इलाकों के लोगों को ज्यादा प्रभावित करता है जहां आस-पास सूअर रहते हैं। मनुष्यों के लिए भी खतरनाक मच्छर यहां के पानी में पनपकर आसपास के लोगों को संक्रमित कर सकते हैं। जो न केवल पशुओं बल्कि मनुष्यों के लिए भी खतरनाक हो सकता है। ग्रामीणों से अपील की गई है कि वे अपने आसपास स्वच्छता बनाए रखें और सूअर बाड़ों को मच्छर मुक्त रखें। मच्छर नाशक दवाओं का छिड़काव स्थिति को नियंत्रित करने के लिए प्रशासन ने कई कदम उठाए हैं। वेक्टर कंट्रोल अभियान के तहत प्रभावित क्षेत्रों में मच्छर नाशक दवाओं का छिड़काव किया जा रहा है। नागरिकों को सतर्क रहने की सलाह प्रशासन ने नागरिकों को सतर्क रहने की सलाह दी है। लोगों से कहा गया है कि वे रात में मच्छरदानी का उपयोग करें, आसपास पानी जमा न होने दें और संदिग्ध लक्षण दिखने पर तुरंत चिकित्सा सहायता लें। प्रभावित क्षेत्र में रखी जा रही निगरानी पशुओं में लक्षण दिखने पर पशु चिकित्सा केंद्र और मनुष्यों में लक्षण दिखने पर नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र में तत्काल संपर्क करने की सलाह दी गई है। प्रभावित क्षेत्र में लगातार निगरानी रखी जा रही है।


