कोटा अपनी नमकीन और कचौरी के लिए फेमस है। अब कोटा नमकीन बिजनेस का कलस्टर डवलपमेंट और जीआई टैग दिलवाने के लिए व्यवसायी काम करेंगे। इसके लिए इससे जुडे अधिकारियों ने एक बैठक का आयोजन किया। जिसके जिले के अधिकारी भी मौजूद रहे। कोटा नमकीन व्यापार समिति की इस बैठक में हाड़ौती अंचल एवं प्रदेश के विभिन्न जिलों से आए नमकीन निर्माताओं, व्यापारियों, सरकारी विभागों, बैंकों, औद्योगिक संस्थानों और स्पॉन्सर कंपनियों के प्रतिनिधि मौजूद रहे। अध्यक्ष जगदीश गांधी ने बताया कि बैठक में प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्योग उन्नयन योजना (PMFME), मुद्रा योजना, स्टैंड–अप इंडिया, क्रेडिट गारंटी स्कीम, फूड सेफ्टी लाइसेंसिंग, पैकेजिंग–ब्रांडिंग, तकनीकी उन्नयन और बाजार विस्तार जैसी योजनाओं की जानकारी दी गई। अधिकारियों ने योजनाओं के फायदा लेकर लागत घटाने, गुणवत्ता बढ़ाने और निर्यात संभावनाएं विकसित करने पर जोर दिया। कोटा शहर 20 टन नमकीन प्रतिदिन खपत करता है,ऐसे में फूड लैब को मजबूती से चालू कराने और नमकीन क्लस्टर विकसित करने की मांग बताते हुए इस पर काम करने की बात कही। जिला उद्योग केंद्र के प्रतिनिधि हरिमोहन शर्मा ने बैठक को संबोधित करते हुए क्लस्टर डेवलपमेंट स्कीम तथा विश्वकर्मा उद्यमी योजना के अंतर्गत दी जाने वाली सब्सिडी की विस्तृत जानकारी दी। शर्मा ने कहा कि प्रस्तावित कोटा फूड क्लस्टर में कोटा नमकीन जैसे पारंपरिक उत्पादों को शामिल किया जाएगा, जिससे स्थानीय उद्यमियों को उत्पादन बढ़ाने, गुणवत्ता सुधारने और नए बाजारों तक पहुंच बनाने में सहायता मिलेगी। उन्होंने एसपीवी (स्पेशल पर्पज व्हीकल) एवं जीआई टैग की जानकारी देते हुए इस पर काम करने को कहा। व्यापारी गोविंद मित्तल ने कहा कि कोटा कचोरी पहले से ही कोटा के नाम से देशभर में प्रसिद्ध है। जिस प्रकार कोटा साड़ी को जीआई टैग प्राप्त हो चुका है, उसी तरह अगर कोटा कचोरी को भी जीआई टैग दिलाया जाए तो इसके व्यापार में उल्लेखनीय वृद्धि हो सकती है।


