कोटा के दशहरे मेले में शिक्षा मंत्री मदन दिलावर भी पहुंचे। उन्होंने नाव वाले झूले और डॉलर झूले में खूब मज़ा किया। मेला घूमते हुए मंत्री मदन दिलावर को अपना बचपन याद आ गया। उन्होंने बताया कि उनका गांव कोटा से 100 किलोमीटर दूर है, इसलिए बचपन में वे दशहरा मेला नहीं देख पाते थे। जब वे 17-18 साल के थे और संघ के काम से कोटा आए, तब उन्होंने पहली बार ये मेला देखा। उस समय वे 2 रुपए में पूरा मेला घूम लेते थे और गरम जलेबी खाना उन्हें बहुत पसंद था। रामगंज मंडी नगर पालिका अध्यक्ष अखिलेश मेढतवाल, भाजपा उपाध्यक्ष नरेंद्र काला सहित अन्य भाजपा कार्यकर्ता और नेता उनके साथ रहे। शिक्षा मंत्री का दशहरा मेला दौरा, तस्वीरों में PHOTOS झलकियां 1. शिक्षा मंत्री मदन दिलावर दशहरा मेले में पहुंचे और नाव वाला झूला झूले। 2. शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने दशहरा मेले में अपनी विधानसभा क्षेत्र के लोगों के साथ गोभी की पकौड़ियों का स्वाद चखा। 3. दशहरे मेले में शिक्षा मंत्री मदन दिलावर घूमते हुए नजर आए पहले मेलों में भीड़ इतनी होती थी
दिलावर ने पुराने दिनों को याद करते हुए कहा कि पहले मेलों में भीड़ इतनी होती थी कि बाजार से निकलने में ही घंटों लग जाते थे। जगह-जगह खोया-पाया चौकियां होती थीं, जहां लगातार अनाउंसमेंट चलते रहते थे। तब रोशनी भी सीमित थी, लेकिन आज बिजली की जगमगाहट से रात में भी दिन जैसा नजारा होता है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि पहले जैसी भीड़ अब नहीं दिखती।
मेला घूमने का बजट सिर्फ 2 रुपए था
उन्होंने याद किया कि उस दौर में जलेबी, केले और पकौड़ी ही उनकी खास पसंद हुआ करती थी। मेला घूमने का बजट सिर्फ 2 रुपए था, जबकि उस समय वे थर्मल में नौकरी करते थे और 450 रुपए वेतन पाते थे। फोटो खिंचवाने की इच्छा होते हुए भी खर्च अधिक होने से वे तस्वीरें नहीं खिंचवा पाते।
मेला ज्यादा व्यवस्थित और सुरक्षित हो गया
मंत्री दिलावर ने कहा कि अब मेला ज्यादा व्यवस्थित और सुरक्षित हो गया है। पहले जहां भगदड़ का माहौल रहता था, वहीं अब व्यवस्थाओं में सुधार हुआ है। लेकिन जनता का उत्साह और भीड़ पहले जैसी नहीं रही। फिर भी दशहरा मेला आज भी उनकी बचपन की यादों से जुड़ा सबसे बड़ा आकर्षण है।


