कोटा के राष्ट्रीय दशहरा मेले में इस बार गज़ल, कव्वाली और मुशायरा जैसे पारंपरिक और लोकप्रिय कार्यक्रमों को हटा दिया गया है। इसे लेकर कांग्रेस ने मेला आयोजन समिति पर आरोप लगाया है। कांग्रेस नेताओं का आरोप है कि भाजपा सरकार सांस्कृतिक राजनीति कर रही है। जानबूझकर ऐसे कार्यक्रमों को हटाया गया है जो समाज के हर वर्ग को जोड़ते हैं। शांति धारीवाल और प्रहलाद गुंजल के लोगों ने अलग-अलग समय ज्ञापन दिया। मांग चाहे दोनों गुटों की एक हो लेकिन दोनों साथ खड़े नजर नहीं आए हैं। सांस्कृतिक कार्यक्रमों को दोबारा शामिल करने की मांग
शहर जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष रविंद्र त्यागी ने कहा कि पहले इन कार्यक्रमों में बड़े कव्वाल और मशहूर ग़ज़ल गायक शामिल होते थे। अब इन्हें बंद कर देना गलत है। उन्होंने कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर मांग की है कि इन सांस्कृतिक कार्यक्रमों को दोबारा शामिल किया जाए। कांग्रेस का बोर्ड फिर भी चर्चा नहीं
उप महापौर सोनू कुरैशी ने भी कांग्रेसी पार्षदों के साथ बैठक कर मेले की रूपरेखा पर विरोध जताया। उन्होंने कहा कि एक-एक कर इन कार्यक्रमों को बंद किया जा रहा है। नगर निगम में कांग्रेस का बोर्ड है। उसके बावजूद भी किसी से मेले के बारे में चर्चा नहीं की। इसके चलते हमने कलेक्ट्रेट दफ्तर में एडीएम को ज्ञापन सौंपा। एक मुद्दे पर भी कांग्रेस के दो गुट बने
इस एक ही मुद्दे पर कांग्रेस दो गुटों में बंट गई है। शांति धारीवाल गुट से सोनू कुरैशी और प्रहलाद गुंजल गुट से रविंद्र त्यागी ने अलग-अलग समय पर ज्ञापन दिए। यानी कांग्रेस एक ही मांग को लेकर दो हिस्सों में विभाजित दिख रही है। इस गुटबाजी ने पार्टी को खुद सवालों के घेरे में खड़ा कर दिया है।


