कोटा में नगर निगम की तरफ से डेयरी बूथों पर औचक निरीक्षण कर कार्यवाही की जा रही है। जहां डेयरी उत्पाद के अलावा अन्य सामग्री बेची जा रही है उन्हें जब्त किया जा रहा है। साथ ही अवैध बूथ संचालकों, एनओसी सबलेट करने वाले और बूथ के साथ पास की जगह पर अतिक्रमण करने वालों पर अभियान चलाया जा रहा है। निगम की तरफ से रिपोर्ट दर्ज करवाने की चेतावनी भी दी गई है, जिसके बाद कोटा में डेयरी बूथ संचालक निगम के विरोध में उतर गए हैं। कोटा सरस डेयरी बूथ विकास समिति के बैनर तले बूथ संचालकों की तरफ से कलेक्टर को ज्ञापन दिया गया है। साथ ही आंदोलन की चेतावनी दी गई है। समिति अध्यक्ष शरद कुमार ने बताया कि डेयरी बूथ ही हम लोगों की आजीविका का एकमात्र सहारा है। सभी सरस बूथ संचालक बहुत ही निम्न आय वर्ग के छोटे व्यापारी वर्ग से संबंध रखते हैं। संचालक एकमात्र सरस एवं उसके उत्पाद को बेचकर कुछ आय कमाते है। वर्तमान समय में संचालकों को डेयरी की तरफ से दो रूपए किलो के हिसाब से मुनाफा दिया जा रहा है। उसमें भी डेयरी की ओर से 1239 रुपए प्रतिमाह किराया एवं लाइट का बिल मिलाकर लगभग चार से पांच हजार का खर्चा महीने का जाता है। वर्तमान में स्थिति यह हो गई है की अधिकतर बूथ संचालक व्यापारिक कर्ज एवं अन्य प्रकार की आर्थिक समस्याओं से जूझ रहे हैं। इसके बावजूद प्रशासन की ओर से आए दिन कभी अतिक्रमण के नाम पर, कभी अवैध सामग्री बेचने के नाम पर आए दिन दमन किया जा रहा है। साथ ही डेयरी प्रशासन की तरफ से भी आए दिन दूध की सप्लाई बढ़ाने एवं ऐसे उत्पाद जो बूथ पर नहीं चलते हैं उनको बेचने संबंधी दबाव बनाया जाता है। कोटा सरस डेयरी द्वारा वैध बूथों पर यह नियम लागू किया जाता है कि वह सरस के अलावा अन्य उत्पाद नहीं बेच सकते, जबकि खुद डेयरी की ओर से ही अन्य दुकानदारों, अतिक्रमण वाले, ठेले-थड़ी वाली दुकानों को दूध एवं अन्य उत्पादों की सप्लाई की जा रही है। बूथ संचालकों ने मांग की कि अवैध रूप से जो बूथ है उन पर कार्यवाही हो लेकिन अनावश्यक हर बूथ संचालक को परेशान न किया जाए। दूध एवं उसके अन्य उत्पाद केवल और केवल वैध बूथों पर ही सप्लाई होने चाहिए। बूथ संचालकों ने चेतावनी दी कि अगर वैध बूथ संचालकों को भी परेशान किया गया और उनकी मांग नहीं मानी गई तो बूथ संचालक आंदोलन करेंगे।


