झारखंड में पिछले कुछ दिनों से हो रही लगातार बारिश ने किसानों की स्थिति को प्रभावित किया है। कोडरमा जिले में धान की फसल को फायदा हुआ है। लेकिन मक्का और अरहर की फसलें बर्बाद हो गई हैं। डोमचांच प्रखंड के नवादा गांव की किसान निर्मला देवी ने 3 एकड़ में मक्का की खेती की थी। उन्हें उम्मीद थी कि मक्का 40 से 50 रुपए किलो तक बिकेगी। लेकिन तीन-चार दिन की लगातार बारिश ने पूरी फसल नष्ट कर दी। जयनगर प्रखंड के किसान रामशंकर यादव ने धान के साथ सब्जियों की भी खेती की थी। धान की फसल अच्छी हुई है। लेकिन मक्का, टमाटर, लौकी, नेनुआ और खीरा जैसी सब्जियां बर्बाद हो गईं। उन्हें करीब एक लाख रुपए का नुकसान हुआ है। बारिश से जलाशयों में पानी बढ़ने से कई इलाकों में बाढ़ जैसी स्थिति बन गई। कुछ लोगों की वज्रपात और पानी के तेज बहाव में जान भी गई। प्रभावित किसान अब जिला प्रशासन से मदद की उम्मीद कर रहे हैं। दलहन फसलों को ज्यादा नुकसान:- कृषि वैज्ञानिक इधर, इस बाबत जयनगर के कृषि विज्ञान केंद्र के कृषि वैज्ञानिक डॉ. अजय कुमार रॉय से बात करने पर उन्होंने बताया कि बीते दिनों हुए लगातार बारिश से सबसे ज्यादा नुकसान दलहन की फसलों को हुआ है। लगातार बारिश से पानी दलहन फसलों द्वारा सोंख लिया जाता है, जिससे वे खराब हो जाते हैं। वहीं इसके अलावा मक्के की फसलों को भी इस बारिश से खासा नुकसान हुआ हैं। उन्होंने कहा कि हालांकि यह बारिश धान की खेती के लिए काफी लाभदायक भी है। इस बारिश के कारण इस बार धान के अच्छे पैदावार होने की उम्मीद है। वहीं, इस बारिश का असर कुछ सब्जियों पर भी पड़ा है, जिसमें लौकी, खीरा टमाटर में विशेष असर देखने को मिल सकता है। उन्होंने कहा कि ज्यादा पानी के जमाव से इन सब्जियों के जड़ों में आतर्गलन होने से ये सब्जियां सड़ सकती हैं या बीमार हो सकती हैं।
मलचिंग से सकते हैं बचाव:- कृषि वैज्ञानिक वहीं, भारी बारिश के कारण हुए फसलों के नुकसान से बचाव के लिए कृषि वैज्ञानिक डॉ. अजय कुमार रॉय ने बताया कि जिन फसलों का नुकसान हो चुका है उसे तो बचा पाना अब मुश्किल है, लेकिन अगर आने वाले दिनों में फिर से बारिश की संभावनाएं दिखती हैं तो किसानों को मलचिंग (प्लास्टिक का घेरा बनाकर बीज बोने की प्रक्रिया) कर बीज बोने की सलाह है। इसके अलावे वे जहां पर भी ऐसे फसलों की बुआई करते हैं, जिसे बारिश से नुकसान हो यहां वे पानी निकासी की उचित व्यवस्था बना लें। इससे बारिश का पानी फसलों की जड़ों में जाने से बचेगा और फसल अच्छे पैदावार देगा। लक्ष्य के अनुरूप हुई थी खेती, फिर भी नुकसान बताते चलें कि इस वर्ष जिले में 8760 हेक्टेयर में मक्का की खेती का लक्ष्य निर्धारित किया गया था। जिसके विरुद्ध किसानों द्वारा 7094 हेक्टेयर बुआई की गई है। जबकि दलहन में 13700 हेक्टेयर लक्ष्य के विरुद्ध 8408 हेक्टेयर में बुआई की गई है।


