कबीरधाम जिले में मानसून दस्तक दे चुकी है। बीते हर साल की तरह इस बार भी जिले में बाढ़ प्रभावित गांवों और वहां रहने वाले ग्रामीणों को बारिश की वजह से परेशानी का सामना करना पड़ेगा। हर साल मानसून में बाढ़ आने पर प्रशासन दावे करता है कि यह करेंगे, वह करेंगे, लेकिन करते कुछ नहीं हैं। जिला मुख्यालय से लगे कोडार गांव को ही देखकर इसका अंदाजा लगा सकते हैं। कोडार में संकरी नदी का कटाव घरों तक पहुंच चुका है। घर से निकलते ही सीधे गहराई में नदी दिखाई देती है। हर बार नदी में रिटेनिंग वॉल बनाने अफसर सिर्फ आश्वासन देते आ रहे हैं। जनप्रतिनिधि गांव आते हैं और फोटो िखंचवाकर चले जाते हैं। लेकिन काम होता नहीं है। नदी का कटाव रोकने रिटेनिंग वॉल नहीं बनने से यहां रहवासी बरसात में डरे रहते हैं। कुछ ने तो दूसरी जगह पर घर बना लिए हैं। वहीं जो परिवार अभी नदी किनारे रह रहे हैं, वे बरसात में नदी का जलस्तर बढ़ने पर पंचायत या दूसरे सार्वजनिक भवन में रहने को मजबूर हो जाएंगे। इधर, सहसपुर लोहारा तहसील क्षेत्र के ग्राम सहसपुर और बड़ौदा खुर्द के बीच कर्रा नाला (नदी) प्रवाहित है। बरसात में नदी का जलस्तर बढ़ जाता है, जिससे आसपास के 6 से ज्यादा गांव का संपर्क जिला मुख्यालय कवर्धा से कट जाता है। वर्ष 2018 में तत्कालीन रमन सरकार ने यहां पुल बनाने 63 लाख रुपए स्वीकृति दी थी। टेंडर की प्रक्रिया भी पूरी हो चुकी थी, लेकिन सत्ता परिवर्तन के बाद पुल का काम ठंडे बस्ते में चला गया। सभी विभागों को तैयार रहने निर्देश: कलेक्टर जिले में संभावित बाढ़ से निपटने के लिए कलेक्टर गोपाल वर्मा ने सभी विभागों को तैयार रहने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि बारिश के दौरान और बाद की सभी गतिविधियों के लिए विभाग जिम्मेदारी तय कर दी है। अधिकारियों को सजग रहने कहा है। ताकि आपात स्थिति में नुकसान रोका जा सके। जिले में मानसून आने की सामान्य तिथि 12 जून है। इस बार मानसून 6 दिन देरी से यानी 18 जून को पहुंचा। मानसून आने के साथ जिले में 12 मिमी औसत बारिश हुई। जिले में खंड वर्षा की स्थिति बनी हुई है। पिछले 10 दिन में जिले में 13.26 मिमी औसत बारिश हुई है। 16 जून को सबसे ज्यादा 42.5 मिमी औसत बारिश हुई थी। इधर किसानों की फिक्र बढ़ गई है कहीं खेती पिछड़ न जाए।


