छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले में आदिवासी गर्ल्स हॉस्टल परिसर में एक प्रीमेच्योर नवजात बच्ची पड़ी हुई मिली। छात्राओं ने इसकी जानकारी वार्डन को दी। जांच करने पर वार्डन ने एक छात्रा की हालत देख उस पर संदेह जताया की बच्चा उसका है। हालांकि, संबंधित छात्रा ने इससे सीधे इनकार कर दिया। वहीं छात्रा के परिजनों का कहना है कि बेटी ने कभी अपने गर्भवती होने की जानकारी नहीं दी। फिलहाल, नवजात को जिला मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया है, जहां उसकी हालत नाजुक बनी हुई है। मामला पौड़ी जिला मुख्यालय से 42 किलोमीटर दूर उपरोड़ा विकासखंड स्थित कस्तूरबा गांधी सरकारी गर्ल्स हॉस्टल का है। यहां आदिम जाति कल्याण विभाग के द्वारा आवासीय गर्ल्स हॉस्टल का संचालन किया जा रहा है। 7 से 8 महीने की नवजात बच्ची जानकारी के अनुसार हॉस्टल में रहने वाली एक छात्रा ने परिसर में ही लगभग 7-8 महीने के शिशु को जन्म दिया। इस मामले की खबर जल्द ही संस्था में फैल गई, जिस पर छात्रावास अधीक्षक जया कुमारी रात्रे ने संज्ञान लिया। छात्रा ने किया इनकार, कहा- उसे कोई जानकारी नहीं उन्होंने नवजात के जन्म के बारे में संबंधित छात्रा से पूछताछ की तो उसने इससे इनकार कर दिया। उसने कहा की शिशु किसका है ,उसे नहीं पता। बाद में छात्रा के माता-पिता को बुलाकर पूछताछ की गई तो उनका कहना था कि बेटी ने पहले कभी भी अपने गर्भवती होने के बारे में कोई सूचना नहीं दी थी। प्रीमेच्योर बच्ची को कोरबा के मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल के विशेष नवजात शिशु वार्ड में भर्ती किया गया है। नवजात को केयर यूनिट में रखा गया जिला मेडिकल कॉलेज में शिशु रोग विशेषज्ञ डॉक्टर राकेश वर्मा ने बताया कि बताया कि नवजात लगभग 7 से 8 महीने की है। ऑक्सीजन की कमी के कारण कुछ समस्याएं हैं, इसलिए उसे केयर यूनिट में रखा गया है। बच्ची के पैर पर चोट के निशान शिशु के एक पैर पर चोट के निशान है। इसे लेकर डॉक्टर ने बताया कि यह स्पष्ट नहीं हो सका है कि ऐसा क्यों हुआ। शिशु को ठंड लग गई थी और उसे हीटर से हीट देकर गर्म किया गया है, फिलहाल अभी बच्चे की हालत नाजुक बनी हुई है। घटना की सूचना मिलते ही संबंधित विभाग मौके पर पहुंच आगे की जांच कार्रवाई कर रहा है। संबंधित विभाग ने इसकी शिकायत पुलिस से भी की है।


