यूजीसी को लेकर प्रदेश के उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार ने गुरुवार को मीडिया से चर्चा की। वे आयोजन में शामिल होने के लिए इंदौर आए थे। आयोजन में शामिल होने के बाद उन्होंने यूजीसी को लेकर पूछे सवालों के जवाब दिए। हालांकि कुछ सवालों के जवाब देने के लिए बाद वे वहां से चले गए। प्रदेश के उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार गुरुवार को एक आयोजन में शामिल होने पहुंचे थे। यूजीसी को लेकर पूछे सवालों पर मंत्री परमार ने कहा कि यूजीसी को लेकर लोगों ने जानबूझकर कर बड़ा भ्रम फैलाने की कोशिश की थी। मैं समझता हूं कि सुप्रीम कोर्ट ने उस पर पहल करते हुए सबको फिर से पुर्नविचार करने का अवसर दिया है और फिर से उसको आगे बढ़ाने के लिए कहा है, इसलिए उसमें फिर से विचार होकर के कोर्ट के निर्देशों के अनुसार, पहले भी कोर्ट के निर्देशानुसार हुआ था, अब भी कोर्ट के निर्देशानुसार आगे की चीजें आगे निर्धारित होंगी। लोगों का भ्रम दूर हो जाएगा
अभी भी तो 2012 कहा है, 2012 का पहले भी था। उसी को लेकर लोगों की शिकायतें थी, उसके आधार पर ये चीजें आई थी। अब फिर से कोर्ट ने कहा है कि फिर से पुर्नविचार करो, मैं समझता हूं कि सुप्रीम कोर्ट ने बहुत अच्छा कहा है ताकि लोगों का भ्रम दूर हो जाएगा। इसके बाद कुछ भी सवाल मंत्री से किए गए, लेकिन उन्होंने उन सवालों के जवाब नहीं दिए और कहा कि कोर्ट का विषय है इस पर वे कुछ नहीं बोल सकते। दरअसल, मध्य प्रदेश के विकास के लिए शिक्षा विषय पर आयोजित मध्यप्रदेश ज्ञान सभा का समापन उच्च शिक्षा मंत्री श्री इंदर सिंह परमार के मुख्य अतिथ्य में सम्पन्न हुआ। आयोजन में मंत्री परमार ने कहा कि ज्ञान सभा मप्र को दिशा देने की कोशिश के रूप में देखता हूं। 2020 शिक्षा नीति आने के बाद हमने अपने को पहचानना शुरू कर दिया है। भारत ने ज्ञान के आधार पर दुनिया को जीता था। शक्ति का आधार भारत का ज्ञान है। हमारे प्रदेश में राष्ट्रीय शिक्षा नीति को सर्व प्रथम क्रियान्वित किया है, इसमें डॉ. अतुल कोठारी का महत्वपूर्ण योगदान है। समापन कार्यक्रम में सम्राट विक्रमादित्य विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. अर्पण भारद्वाज, श्री वैष्णव विद्यापीठ विश्वविद्यालय के कुलाधिपति पुरुषोत्तमदास पसारी ने भी संबोधित किया। समापन कार्यक्रम में अतिथियों द्वारा इंदौर के महापौर पुष्यमित्र भार्गव को इण्डिया नहीं भारत का प्रयोग करने पर सम्मानित किया गया। समापन कार्यक्रम का संचालन डॉ. दिनेश दवे ने किया।


