विशेष न्यायाधीश ने ईओडब्ल्यू की खात्मा रिपोर्ट को स्वीकार करने से इनकार कर दिया। विशेष न्यायाधीश साबिर अहमद खान ने आदेश में कहा – पेश किए गए तथ्यों के अवलोकन से स्पष्ट है कि अधूरा अनुसंधान कर खात्मा रिपोर्ट पेश कर दी गई। जिसे इस स्टेज पर विचार नहीं किया जा सकता। ऐसे में मूल प्रकरण, दस्तावेजों के साथ एसपी को वापस भेजा जाता है। ताकि वह प्रकरण में की गई शिकायत के आधार पर अतिरिक्त अनुसंधान करें। आरोपी उपयंत्री वर्षा मिश्रा के दोषी होने या फिर उसके खिलाफ दुर्भावनापूर्ण भाव से ट्रैप की कार्यवाही कराए जाने की दशा में दोषी व्यक्ति के खिलाफ उचित दायित्व निर्धारित कर फिर से अंतिम प्रतिवेदन प्रस्तुत करें। उपयंत्री ने बिल के भुगतान में मांगा था 5% कमीशन प्रकरण की जानकारी देते हुए एडवोकेट आशीष शर्मा ने बताया – अनूप सिंह यादव (पार्टनर का नाम सुरेश सिंह यादव) को नगर निगम में पार्कों के संधारण का ठेका मिला था। कुल 6.71 लाख के बिल के भुगतान के लिए उसने उपयंत्री वर्षा मिश्रा से संपर्क किया। ईओडब्ल्यू में की गई शिकायत में वर्षा मिश्रा पर बिल भुगतान के एवज में 10% कमीशन मांगने का आरोप लगाया। बाद में 5 फीसदी में डील तय हुई। इसके संबंध में 10 फरवरी 2023 को ट्रैप की कार्यवाही की गई। जिसमें वर्षा मिश्रा को 15 हजार रुपए रिश्वत लेते हुए पकड़ा गया। इसके बाद उसे थाना विश्वविद्यालय ले जाया गया। ईओडब्ल्यू की ओर से बताया गया कि अनूप यादव मूल ठेकेदार नहीं है। ठेकेदार सुरेश सिंह यादव ने फरियादी अनूप सिंह से कोई संबंध नहीं होने का शपथ पत्र दिया है। इस तथ्य को खारिज करते हुए कोर्ट ने कहा कि इस मामले की सूक्ष्मता से जांच किए बिना खात्मा रिपोर्ट प्रस्तुत कर दिया गया। फरियादी अनूप सिंह ने न्यायालय में और साक्ष्य पेश किए, जिसे ईओडब्ल्यू को जांच में लेना चाहिए था।


