कोर्ट ने पलटा पुलिस का फ़ैंसला:रैप के मामले में एफआर लगाने के बाद लिया प्रसंज्ञान, सुनाई दस साल की सजा और एक लाख का जुर्माना

भीलवाड़ा की पॉक्सो कोर्ट ने रेप के मामले में पुलिस द्वारा लगाई एफआर पर प्रसंज्ञान लेते हुए आरोपी को 10 साल की कैद और एक लाख से दंडित किया है।पुलिस ने इस मामले में रैप की घटना नहीं मानते हुये एफआर कोर्ट में में पेश कर दी थी।कोर्ट ने इस मामले में प्रसंज्ञान लिया।इस दौरान 21 गवाहों के बयान और 25 डॉक्यूमेंट पेश किए गए। यह था मामला विशिष्ट लोक अभियोजक धर्मवीरसिंह कानावत ने बताया कि बिजौलियां थाने में 6 मार्च 2022 को एक परिवादी ने रिपोर्ट दी कि उसकी नाबालिग बहन घर के बाहर चबूतरे पर बैठी थी।इसी दौरान आरोपित युवक वहां आया और नाबालिग को अकेला पाकर उसका मुंह चुन्नी से बंद कर एक बाड़े में ले जाकर रैप किया। आरोपित ने नाबालिग को इस घटना के बारे में किसी को बताने पर जान से मारने की धमकी दी और इसके बाद वहां से भाग छूटा।पीडिता रोती-बिलखती अपने घर आई,परिजनों ने उससे पूछा तो उसने अपने साथ हुई घटना की जानकारी दी।पुलिस ने पोक्सो एक्ट के तहत केस दर्ज कर जांच की। पुलिस ने अपराध नहीं माना और लगा दी एफआर पुलिस ने अपनी जांच में कोई अपराध नहीं मानते हुये मामले में एफआर कोर्ट में पेश की।कोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुये प्रसंज्ञान लिया और ट्रायल शुरु की। 21 गवाहों के बयान और 25 डॉक्यूमेंट किए पेश ट्रायल के दौरान 21 गवाहों के बयान दर्ज करवाते हुये 25 डॉक्यूमेंट पेश कर आरोपित आशुतोष पर जुर्म साबित करवाया। न्यायालय ने सुनवाई पूरी होने पर आरोपित को 10 वर्ष के सश्रम कारावास व एक लाख रुपये के जुर्मान् से दंडित किया है।

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