कोर्ट ने पुलिस-अधिकारी को जेल भेजा, 2 घंटे बाद जमानत:10 साल पुराने मामलों में गवाह थे, बुलाने पर भी नहीं आ रहे थे; गिरफ्तारी वारंट निकालना पड़ा

कोर्ट में गवाही के लिए बुलाए जाने के बावजूद पेश नहीं होने वाले पाली के खिंवाड़ा थाने के CI उगमराज सोनी को अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट-2 ने जेल भेजने के आदेश दिए। ऐसे में, करीब 2 घंटे हिरासत में रहने के बाद पुलिस अधिकारी के वकील ने माफी और जमानत याचिका लगाई। इसके बाद बाड़मेर के 2 CI ने गवाह के रूप में जमानत दी तब जाकर CI रिहा हुए। अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट संख्या-2 बाड़मेर के तलब करने के बावजूद CI करीब 10 से ज्यादा बार नहीं आए थे। इसके बाद कोर्ट ने गिरफ्तारी वारंट भी निकाला था। उन्हें 10 साल पुराने मामलों के निपटारे के लिए गवाही देनी थी। 10 साल पुराने मामलों में गवाह थे सीआई के वकील पवन गिरी सोडियार ने बताया- शनिवार को पाली के खिंवाड़ा थाना CI उगमराज को कोर्ट ने पेश होने के आदेश दिए थे। 10 साल पुराने धोखाधड़ी और चोरी के मामले में सोनी जांच अधिकारी थे। 10 साल से पुराने मामलों में सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के निर्देश हैं इनका तत्काल निस्तारण किया जाए। अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट-2 में 10 साल से ज्यादा 2 मामले चल रहे थे। उसमें इनकी गवाही अहम थी। उन्हें 10 से ज्यादा बार कोर्ट में बुलाया गया था। लेकिन, वे नहीं आ रहे थे। 2 CI ने गवाह बनकर जमानत दिलवाई पवन गिरी ने बताया- अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट-2 अंकुर गुप्ता ने कोर्ट की अवमानना और लगातार अनुपस्थित रहने पर सीआई उगमराज सोनी को जेल भेजने के निर्देश दिए। इसके बाद हमारी तरफ से माफी और जमानत याचिका लगाई गई। बाड़मेर के ही दो सीआई ने कोर्ट में गवाह बन कर उनकी जमानत पर हस्ताक्षर किए। पेश हुए तब गिरफ्तारी वारंट से तलब थे सीआई के वकील पवन गिरी सोडियार ने बताया- CI आज कोर्ट में पेश हुए थे तब गिरफ्तारी वारंट से तलब थे। कोर्ट के आदेश पर उनको हिरासत में ले लिया गया। कोर्ट में जमानत याचिका लगाई इसके बाद उनको रिहा किया गया। वकील का कहना है कि कोर्ट जब किसी गवाह को तलब करता है तब उनको उपस्थित होकर उनको गवाही देनी होती है। उस समय इनके कई कारण रहें होंगे। वो आ नहीं पाए। इससे मामलों का निस्तारण समय पर नहीं हो पाया। इसलिए बार-बार कोर्ट इनको बार-बार तलब कर रहा था। जब नहीं आए तो गिरफ्तारी वारंट से इनको तलब किया गया।

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