कोसों दूर से पैदल पहुंचे हैं ग्रामीण पर फरियाद सुनने वाला कोई नहीं

भास्कर न्यूज | नारायणपुर जिले के ओरछा ब्लॉक मुख्यालय में जनपद पंचायत कार्यालय संचालित है। यह कार्यालय विशेष रूप से अबूझमाड़ क्षेत्र के दूरस्थ और पहुंचविहीन गांवों के ग्रामीणों के लिए बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि यही उनके लिए सबसे नजदीकी प्रशासनिक केंद्र है। बावजूद इसके, जनपद कार्यालय में अधिकारियों और कर्मचारियों की लगातार गैर मौजूदगी ग्रामीणों की परेशानियों को और बढ़ा रही है। हालात ऐसे हैं कि ग्रामीण कई-कई किलोमीटर पैदल चलकर यहां पहुंचते हैं, लेकिन काम नहीं होने पर उन्हें मायूस होकर लौटना पड़ता है। अबूझमाड़ के कई गांवों से ग्रामीण अपने शासकीय कार्यों जैसे राशन कार्ड, पेंशन, नाम जोड़ने या हटाने, प्रमाण पत्र आदि के लिए 50 से 60 किलोमीटर का सफर पैदल तय कर ओरछा पहुंचते हैं। यह सफर उनके लिए न केवल शारीरिक रूप से कठिन होता है, बल्कि आर्थिक रूप से भी भारी पड़ता है। ओरछा पहुंचने के बाद यदि अधिकारी मौजूद न हों, तो उन्हें मजबूरी में 65 किलोमीटर दूर नारायणपुर जिला मुख्यालय जाना पड़ता है, जिससे समय, पैसा और श्रम तीनों का नुकसान होता है। रुकने, खाने-पीने और आने-जाने की व्यवस्था करना गरीब ग्रामीणों के लिए किसी बड़ी चुनौती से कम नहीं है। जनपद पंचायत ओरछा के अध्यक्ष नरेश कोर्राम ने इस गंभीर समस्या को लेकर वन मंत्री केदार कश्यप और कलेक्टर से मांग की थी कि जनपद पंचायत ओरछा के शासकीय कार्यालय को नियमित रूप से संचालित करने के लिए अधिकारियों की पदस्थापना ओरछा में की जाए। उन्होंने यह भी बताया कि वर्तमान में जनपद कार्यालय का अधिकांश कामकाज नारायणपुर जिला मुख्यालय से ही किया जा रहा है, जिसका खामियाजा अबूझमाड़ के ग्रामीणों को भुगतना पड़ रहा है। साप्ताहिक बाजार के दिन ग्रामीण शासकीय काम निपटाने पहुंचते हैं : ग्रामीणों के लिए बुधवार का दिन विशेष रूप से महत्वपूर्ण होता है, क्योंकि इसी दिन ओरछा में साप्ताहिक बाजार लगता है। इस दिन बड़ी संख्या में ग्रामीण अपनी रोजमर्रा की जरूरतों का सामान, शासकीय राशन लेने के साथ-साथ अपने शासकीय काम भी निपटाने आते हैं। लेकिन जब कार्यालय में अधिकारी ही मौजूद नहीं होते, तो उनके सारे प्रयास बेकार चले जाते हैं और काम जस का तस रह जाता है। हालांकि कलेक्टर द्वारा ओरछा मुख्यालय में सप्ताह में तीन दिन कार्यालय संचालित करने के निर्देश दिए गए हैं, लेकिन इसके बावजूद अधिकारी अपनी मनमानी करते हुए जिला मुख्यालय से ही कार्यों का संपादन कर रहे हैं। इस स्थिति को लेकर ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों में भारी नाराजगी देखी जा रही है। थुलथुली गांव से पैदल चलकर ओरछा पहुंचे श्यामलाल मंडावी ने बताया कि वे राशन कार्ड से नाम कटवाने जनपद कार्यालय आए थे, लेकिन यहां कोई भी अधिकारी या बाबू मौजूद नहीं मिला। अब उन्हें नारायणपुर जाना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि जब यहां कार्यालय है तो उसका मतलब तभी है जब अधिकारी भी यहां मौजूद रहें। हर छोटे काम के लिए जिला मुख्यालय आना-जाना बहुत परेशानी भरा है, जिस पर सरकार को गंभीरता से कदम उठाना चाहिए। ग्रामीणों की मांग है कि ओरछा जनपद कार्यालय को वास्तव में सक्रिय बनाया जाए, ताकि अबूझमाड़ जैसे दुर्गम क्षेत्र के लोगों को उनका हक और सुविधा नजदीकी केंद्र पर ही मिल सके।

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