आरयूएचएस का वाइस चांसलर (वीसी) कौन? इसे लेकर पिछले 11 दिन से संशय की स्थिति बनी हुई है। दावेदारों के इंटरव्यू हो चुके हैं, लेकिन एप्रोच के चलते उच्च स्तर पर यह तय नहीं किया जा पा रहा है कि वीसी किसे बनाया जाए। दावेदारों में महाराष्ट्र के सीनियर फार्मासिस्ट डॉ. प्रमोद येवले का भी नाम है, जिनका प्रदेश स्तर पर विरोध हो रहा है और आंतरिक स्तर पर आपत्ति जताई जा रही है। ऐसा पहली बार हुआ है। प्रदेश के बाहर के व्यक्ति को वीसी बनाए जाने के विरोध में डॉक्टर्स एसोसिएशन एकजुट हो गई हैं। उन्होंने सरकार को पत्र लिखा है कि प्रदेश के बाहर से आए व्यक्ति को वीसी बनाए जाने से कई तरह की परेशानियां सामने आएंगी। वीसी का पद किसी डॉक्टर को ही दिया जाए। सामने आया है कि महाराष्ट्र से आवेदन करने वाले व्यक्ति सीनियर फार्मासिस्ट हैं और एप्रोच के चलते उन्हें वीसी बनाया जा सकता है। सुर्खियों में वीसी पद… वीसी के लिए 28 जनवरी को हुए इंटरव्यू में राजस्थान के 5 डॉक्टर्स और मुंबई के एक डॉ. को लिस्टेट किया गया था। कार्यवाहक वीसी डॉ. धनंजय अग्रवाल को इंटरव्यू में नहीं बुलाने से मामला सुर्खियों में था। जब चर्चा चली कि महाराष्ट्र के दावेदार को वीसी बनाया जा सकता है तो सरकार स्तर पर अंदरखाने और पत्र लिखकर आपत्ति जताई गई। नतीजा- वीसी के नाम की घोषणा अटक गई। मालूम हो कि आरयूएचएस नॉमिनी डॉ. विजयेंद्र कुमार, एसएमएस से रिटायर हो चुके प्रो.अरुण चोगले, स्टेट गवर्नमेंट नॉमिनी गायत्री राठौड़ व आईसीएमआर प्रतिनिधि डॉ. संघमित्रा पाति ने दावेदारों का इंटरव्यू लिया था। प्रदेश के ये सीनियर डॉक्टर दावेदार… प्रदेश के कई सीनियर डॉक्टर्स ने वीसी के लिए आवेदन किया है। इनमें जेएलएन मेडिकल कॉलेज के पूर्व प्रिंसिपल डॉ. वीबी सिंह, एसएमएस के पूर्व एडिशनल प्रिंसिपल व अधीक्षक और आरयूएचएस के प्रिंसिपल रह चुके डॉ. राजेश शर्मा, एसएमएस के एडिशनल प्रिंसिपल डॉ. एसएम शर्मा और आरएनटी मेडिकल कॉलेज उदयपुर के पूर्व प्रिंसिपल डॉ. लाखन पोसवाल शामिल हैं। आखिर अधीक्षक क्यों नहीं बना रही सरकार? एक ओर वीसी के नाम पर मुहर नहीं लग पा रही है, वहीं सरकार 3 महीने में जयपुर के 8 और प्रदेश के 30 अस्पतालों में अधीक्षक की स्थायी नियुक्ति नहीं कर सकी है। विगत छह महीने में दो बार आवेदन मांग चुकी है। पहले योग्य दावेदार नहीं आने की बात कही गई, लेकिन दोबारा इंटरव्यू होने के बाद भी एसएमएस, जेके लोन, महिला, गणगौरी, कांवटिया, स्टेट कैंसर इंस्टीट्यूट के अधीक्षक नहीं लगा सकी। अजमेर मेडिकल कॉलेज के दो, बीकानेर मेडिकल कॉलेज के चार, जोधपुर मेडिकल कॉलेज के सात, कोटा मेडिकल कॉलेज के पांच और उदयपुर मेडिकल कॉलेज के चार अस्पतालों में नए अधीक्षक लगाए जाने हैं। महाराष्ट्र में भी विवादों में रहे डॉ. येवले येवले महाराष्ट्र में भी विवादों से जुड़े रहे हैं। वर्धा में प्राचार्य पद के लिए 15 सालों के अनुभव के मामले में मुंबई हाईकोर्ट के नागपुर बैंच तक मामला पहुंचा। नागपुर के राष्ट्रसंत तुकडोजी महाराज विवि के वीसी पर चयन हुआ और नियुक्ति मामले में कोर्ट ने उन पर फाइन लगाया। डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर मराठवाडा विवि में वीसी रहते हुए उन पर प्राध्यापक संगठनों, छात्र संगठनों ने शिकायतें दर्ज कराई। वे महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री और संघ परिवार के नजदीकी देवेंद्र फडणवीस का नजदीकी माने जाते हैं।


