क्या औरंगजेब की हवेली ढहा दी गई?:अखिलेश ने उठाया था सवाल, मुबारक मंजिल के मालिक बोले- तोड़फोड़ संरक्षित इमारत से 5KM दूर हुई

आगरा में मुगल काल में बनी औरंगजेब की हवेली क्या ढहा दी गई है? जिसे सपा प्रमुख अखिलेश यादव से लेकर आप के नेता योगी सरकार और राज्य पुरातत्व विभाग से संरक्षित करने की मांग रहे हैं। दरअसल, अखिलेश यादव के सोशल मीडिया X पर औरंगजेब की हवेली में तोड़फोड़ पर सवाल उठाए गए। 24 घंटे में 2 ट्वीट किए। औरंगजेब की हवेली क्या वाकई तोड़ दी गई है। यह जानने के लिए भास्कर डिजिटल एप की टीम बेलनगंज में वहां पहुंची, जहां तोड़फोड़ हुई। फिर बल्केश्वर में वो जगह भी देखी, जो संरक्षित इमारत औरंगजेब की हवेली बताई जा रही है। सामने आया कि औरंगजेब की हवेली टूटी नहीं है, वो मुबारक मंजिल बल्केश्वर में सलामत है। जो बिल्डिंग तोड़ी गई है, वह 5 Km दूर बेलनगंज का आउटर हाउस है। जिसे राज्य पुरातत्व विभाग संरक्षित नहीं मानता है। राज्य पुरातत्व विभाग की टीम ने सर्वे के बाद डिक्लेयर किया कि मुबारक मंजिल अपनी जगह पर ठीक है। यह भी सामने आया कि बल्केश्वर स्थित औरंगजेब की हवेली (मुबारक मंजिल) के लिए राज्य पुरातत्व विभाग ने 30 सितंबर, 2024 को संरक्षण के लिए प्रारंभिक अधिसूचना जारी की थी। आप नेता बोले- ये मिलकर गुमराह कर रहे
इस मामले में आम आदमी पार्टी के पूर्व जिलाध्यक्ष कपिल बाजपेयी ने कहा- सब लोग मिलकर गुमराह कर रहे हैं। हम इस मामले में कोर्ट में याचिका लगाएंगे। मुबारक मंजिल के मालिक बरुण चंद ने कहा- मेरे ही दादा के भाई के परिवार की जमीन है। बिल्डर ने वहां तोड़फोड़ की है। मगर वह मुबारक मंजिल नहीं है। इस मामले में सियासत शुरू होने के बाद डीएम आगरा अरविंद मल्लप्पा बंगारी ने रिपोर्ट मांगी है। पढ़िए रिपोर्ट… खबर पढ़ने से पहले दोनों इमारतों की तस्वीर देखिए… पहली इमारत : बेलनगंज का इमारत का वो हिस्सा, जो संरक्षित नहीं है… दूसरी इमारत : औरंगजेब की हवेली, जिसे राज्य पुरातत्व विभाग संरक्षित मान रहा है आप नेता बोले- मुबारक मंजिल संरक्षित इमारत
भास्कर ने इस मामले को हाई लाइट करने वाले आम आदमी पार्टी के पूर्व जिलाध्यक्ष कपिल बाजपेयी से बात की। उन्हें ASI और राज्य पुरातत्व विभाग के सर्वे के बारे में बताया। कपिल कहते हैं- सारी जानकारी गलत दी जा रही है। मुबारक मंजिल संरक्षित स्मारक है। इसे लेकर जनहित याचिका दायर की जाएगी। सभी सांसदों को पत्र लिखा गया है। मुबारक मंजिल को तोड़कर अब तक 100-150 ट्रैक्टर-ट्रॉली मलबा हटाया जा चुका है। 70% निर्माण बिल्डर द्वारा तोड़ा जा चुका है। तहसील में सभी दस्तावेज मिल जाएंगे। यह प्राइवेट प्रॉपर्टी नहीं है, अगर है तो दस्तावेज सामने लाए जाएं। संरक्षित इमारतों को कैसे तोड़ा जा सकता है। अखिलेश भी खिलाफत में आए
आगरा में संरक्षित बताई जाने वाली इमारत के तोड़े जाने पर सियासत शुरू हो गई। सिर्फ आप पार्टी ही नहीं, सपा प्रमुख अखिलेश यादव भी आगरा की इस इमारत को तोड़ने के खिलाफ आए। उन्होंने 3 और 4 जनवरी को X पर 2 पोस्ट लिखीं, पढ़िए क्या लिखा गया… इसके बाद दैनिक भास्कर एप की टीम ने मुबारक मंजिल के मालिक बरुण चंद से मुलाकात की। सवाल था कि क्या वाकई मुबारक मंजिल को तोड़ दिया गया है। पूरी स्थिति को 3 सवाल में समझने की कोशिश की… सवाल : ऐतिहासिक इमारत आपके मालिकाना हक में कैसे आई?
जवाब : हमारे पूर्वज सेठ हीरालाल ने 28 जून, 1879 में ब्रिटिश सरकार की नीलामी में मुबारक मंजिल को खरीदा था। उस वक्त इसको कस्टम हाउस कहा जाता था। इसके लिए 17000 रुपए भुगतान हुए थे। सवाल : तो क्या मुबारक मंजिल तोड़ी गई है?
जवाब : नहीं..बल्केश्वर में कस्टम हाउस की बिल्डिंग पूरी तरह से सुरक्षित है। उसको मूल स्वरूप में पूरी तरह से सुरक्षित रखा गया है। सवाल : बेलनगंज में जिस बिल्डिंग में तोड़फोड़ हुई है, वह क्या है?
जवाब : हमारे पूर्वजों द्वारा बनाया गया आउट हाउस को हमारे रिश्तेदार ने एक बिल्डर को बेचा है। मेरे ही दादा के भाई के परिवार की जमीन है। बिल्डर ने वहां तोड़फोड़ की है। मगर वह मुबारक मंजिल नहीं है। जिस औरंगजेब की हवेली के टूटने की चर्चा है, उसकी हकीकत समझने भास्कर टीम राज्य पुरातत्त्व विभाग के राजीव रंजन के पास पहुंची… सवाल : औरंगजेब की हवेली कहां है?
जवाब : विभाग की तरफ से सर्वे किया गया है। सामने आया कि औरंगजेब की हवेली बल्केश्वर में है। उस पर मुबारक मंजिल लिखा हुआ है। इसे ठीक कराया जाएगा। सवाल : ये स्ट्रक्चर कितना पुराना है?
जवाब : यह मुगलकालीन स्ट्रक्चर है। इसके लिए अधिसूचना जारी की गई। तीन महीने पहले नोटिस भी लगाया गया था। अब तक उस पर एक भी आपत्ति नहीं आई है। उसे संरक्षित करने का काम चल रहा है। सवाल : बेलनगंज वाली जगह क्या है? जहां तोड़फोड़ हुई है।
जवाब : बेलनगंज की मुबारक मंजिल प्राइवेट प्रॉपर्टी है। उसे वर्तमान में रह रहे बरुण चंद के पूर्वजों ने अंग्रेजों से खरीदा था। वो संरक्षित इमारत नहीं है। सवाल : जो हिस्सा तोड़ा गया, वहां लाखौरी ईंटों का निर्माण है, इस पर क्या कहेंगे?
जवाब : ये सही है। जिस हिस्से को तोड़ा जा रहा है, वहां हमने सर्वे किया था। वहां मुगलकालीन लाखौरी ईटें मिली हैं। नीचे का हिस्सा मुगलकाल में बना होगा। जबकि ऊपर की मंजिल में ब्रिटिशकालीन निर्माण हैं। मगर वो हिस्सा संरक्षित नहीं है। डीएम ने मांगी है रिपोर्ट
डीएम अरविंद मल्लप्पा बंगारी ने इस मामले में रिपोर्ट मांगी है। इसे लेकर भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण और राजस्व विभाग को जांच करने का निर्देश दिया गया था। शुक्रवार को नायब तहसीलदार, ASI और राजस्व विभाग के साथ ही राज्य पुरातत्व विभाग की टीम मुबारक मंजिल पहुंचे थे। वहां रहने वाले परिवार से दस्तावेज मांगे गए हैं। मुबारक मंजिल से जुड़े इतिहास को भी समझिए… मुबारक मंजिल में शाहजहां, शुजा और औरंगजेल ठहर चुके
आगरा की औरंगजेब की हवेली 17वीं सदी की इमारत है। आस्ट्रियाई इतिहासकार ईबा कोच की किताब ‘द कंप्लीट ताजमहल एंड द रिवरफ्रंट गाइड ऑफ आगरा’ में मुबारक मंजिल का जिक्र है। कुल 3 ऐसी किताबें हैं, जिसमें इस स्पॉट को औरंगजेब की हवेली मुबारक मंजिल करार दिया गया है। ईबा कोच की किताब में एक मैप छपा हुआ है। जिसमें आगरा किला से 5वें, छठवे और सातवें नंबर पर हवेली आलमगीर, मुबारक मंजिल का जिक्र किया गया। मुबारक मंजिल हवेली आलमगीर का ही एक भाग है। औरंगजेब के शासनकाल के दौरान इसको बनाया गया। यहां शाहजहां, शुजा, औरंगजेब समेत मुगल हस्तियां रह चुकी हैं। जब ब्रिटिश शासन आया। तब इसकी संरचना में बदलाव किए गए। इसमें परमिट ऑफिस और नमक ऑफिस बना। 1902 तक इसे तारा निवास के नाम से जाना जाता था। आर्चीबाल्ड कैंपबेल कार्लाइल की 1871 की रिपोर्ट में मुबारक मंजिल से जुड़ी जानकारी है। कहा जाता है कि इसे सामूगढ़ की लड़ाई में जीत के बाद औरंगजेब द्वारा बनाया गया था। इतिहासकार राजकिशोर राजे ने लिखा है कि औरंगजेब ने उसी युद्ध में अपनी जीत की याद में दारा शिकोह के महल का नाम बदल दिया। आगरा के 1868 के नक्शे में मुबारक मंजिल को दिखाया गया है। यह दारा शिकोह लाइब्रेरी के पास है। पास में ही लोहे का पुल दिखाया गया है। ब्रिटिश शासन के दौरान, ईस्ट इंडियन रेलवे ने इसे माल डिपो के रूप में इस्तेमाल किया। चूंकि इसे औरंगजेब ने बनवाया था, इसलिए इसे औरंगजेब की हवेली कहा जाता है। ——————— ये भी पढ़ें : दावा-संभल जामा मस्जिद में मंदिर के सबूत मिले, 45 पन्नों की सर्वे रिपोर्ट दाखिल; 1200 फोटो-वीडियो भी कोर्ट में जमा संभल में शाही जामा मस्जिद की सर्वे रिपोर्ट चंदौसी कोर्ट में दाखिल कर दी गई। गुरुवार को एडवोकेट कमिश्नर रमेश सिंह राघव ने करीब 45 पन्नों की रिपोर्ट सौंपी है। 4.5 घंटे की वीडियोग्राफी और 1200 से अधिक फोटो भी अदालत को दिए गए हैं। पढ़िए पूरी खबर…

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