क्या UGC के कारण पटना यूनिवर्सिटी-झारखंड में हारी भाजपा:45 साल बाद यूनिवर्सिटी में लौटी कांग्रेस, झारखंड में निर्दलीय जीते, 3 पाइंट में हारने की कहानी

2 बड़े रिजल्ट हैं… 1. पटना यूनिर्वसिटी छात्रसंघ चुनाव भाजपा बुरी तरह हार गई है। 45 साल बाद कांग्रेस जीत गई। 2. झारखंड निकाय चुनाव में भाजपा समर्थित प्रत्याशियों की बड़ी हार हुई है। 9 में से सिर्फ 3 मेयर ही भाजपा के बन पाए। भाजपा की इस बड़ी हार के पीछे UGC (यूनिवर्सिटी ग्रांट कमीशन) का नए नियम ‘प्रमोशन ऑफ इक्विटी इन हायर एजुकेशन इंस्टीट्यूशन रेगुलेशन्स, 2026’ तो नहीं है। UGC का नोटिफिकेशन जारी होने के करीब एक महीने बाद चुनाव हुए और भाजपा अपने स्ट्रांग होल्ड वाले एरिया में बुरी तरह लड़खड़ा गई। एक्सपर्ट इस बड़ी हार के पीछे UGC को बड़ा कारण मानते हैं। इन सवालों का जवाब आज के एक्सप्लेनर बूझे की नाहीं में… 3 पॉइंट में UGC ने भाजपा का कैसे गेम बिगाड़ा 1. नाराजगी के कारण भाजपा के वोटर घर से नहीं निकले जनरल कास्ट (ब्राह्मण, भूमिहार, राजपूत, कायस्थ) को भाजपा को कोर वोटर माना जाता है। 13 जनवरी को UGC के नोटिफाई नियम से इस तबके में खासा नाराजगी दिखी। लोग सुप्रीम कोर्ट गए। कोर्ट ने UGC के नए नियम पर रोक लगा दी। सुप्रीम कोर्ट के बावजूद भाजपा ने स्टैंड क्लियर नहीं किया। इससे जनरल कास्ट में नाराजगी है। इसका असर पटना यूनिवर्सिटी और झारखंड निकाय चुनाव के वोटिंग पर्सेंटेज भी दिखा। भाजपा समर्थक वोट देने नहीं निकले। इसे ऐसे समझिए… 2. पुराने भाजपा कार्यकर्ता घर बैठ गए, उत्साह नहीं दिखा पटना यूनिवर्सिटी छात्रसंघ चुनाव पर सीनियर जर्नलिस्ट संजय सिंह कहते हैं, ‘ABVP को सबसे ज्यादा वोट साइंस/कॉमर्स फैकल्टी में मिलता था। इस बार वहां बिल्कुल उत्साह नहीं दिखा। बहुत कम वोट पड़े। इसका बड़ा कारण UGC के नए नियम से कैंपस के अंदर फैला तनाव है।’ 3. ओवर कॉन्फिडेंस और भाजपा नेताओं का बड़बोलापन पटना यूनिवर्सिटी इलेक्शन को लेकर कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में कहा गया है कि ABVP की ‘जिद’ या ओवर कॉन्फिडेंस हार का कारण बना। कैंपस में अनुशासनहीनता, शिक्षकों से मारपीट जैसी घटनाओं ने भी ABVP की इमेज खराब की।

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