रांची| क्रिसमस का आगमन वर्ष के सबसे पवित्र और आनंदमय समय में से एक है। यह केवल एक धार्मिक पर्व का संकेत नहीं, बल्कि मनुष्य के हृदय में समाई दया, प्रेम और सद्भावना को पुनः जागृत करने का अवसर है। दिसंबर का महीना जैसे ही शुरू होता है वातावरण में एक विशेष उत्साह, एक अदृश्य गर्माहट और आशा की चमक महसूस होने लगती है। यही आशा- क्रिसमस आगमन का सार है। आगमन हमें याद दिलाता है कि जीवन की कठिनाइयां, चुनौतियों और अंधेरों के बीच भी प्रकाश मौजूद है। यह प्रकाश बाहरी नहीं अपितु हमारे भीतर की भलाई, सहानुभूति और समझ से फैलती है। इस मौसम का सबसे बड़ा संदेश यही है कि दुनिया को बदलने के लिए कोई बड़ा कार्य आवश्यक नहीं- एक छोटी सी मुस्कान, एक मदद भर हाथ और एक प्रोत्साहन से भरा शब्द भी किसी के जीवन में रोशनी बन सकती है। क्रिसमस आगमन अपने साथ कई पवित्र परंपराएं और प्रतीक लेकर आता है। इसमें सबसे महत्वपूर्ण है- क्रिसमस स्टार जिसे बेतलेहम का तारा भी कहा जाता है। यह तारा केवल एक सजावट नहीं, बल्कि क्रिसमस की पूरी कहानी और उसके आध्यात्मिक अर्थ का केंद्र है। जिस तरह येसु के जन्म के समय आकाश में एक विशेष तारा प्रकट हुआ था और इस तारे की रोशनी ने तीन बुद्धिमान व्यक्तियों को बेतलेहम तक पहुंचाया था। क्रिसमस स्टार यह बताता है कि ईश्वर का प्रकाश हर हृदय में मौजूद है। यह आस्था को मजबूत करता है।


