खंडवा के फर्जी जल पुरस्कार की जांच शुरू:टीम को खेत में नहीं मिला तालाब; पहुंचने से पहले गड्ढा खुदवा दिया, आंगनवाड़ी की छत से पाइप गायब

खंडवा में जल संरक्षण के नाम पर मिले राष्ट्रपति अवॉर्ड के पीछे के फर्जीवाड़े की परतें अब खुलने लगी हैं। दैनिक भास्कर के खुलासे के बाद मंगलवार को भोपाल से सीनियर आईएएस दिनेश कुमार जैन के नेतृत्व में दो सदस्यीय जांच दल खंडवा पहुंचा। टीम ने खबर में प्रकाशित जानकारी के आधार पर गांवों में जाकर ‘रियलिटी चेक’ किया, जिसमें मौके पर चौंकाने वाली गड़बड़ियां मिलीं। जांच दल सबसे पहले हरसूद जनपद के ग्राम डोटखेड़ा पहुंचा। यहां टीम एक किसान के खेत पर गई, जहां कागजों में तालाब निर्माण दर्शाया गया था। हकीकत में वहां खेत में सिर्फ मिट्टी डालकर उसे तालाब का रूप दिया गया था। मौके पर कोई जल संरचना नहीं मिली। टीम ने इस फर्जीवाड़े को नोट किया और आगे बढ़ गई। पलानी माल में खुली पोल- 6 फीट की जगह 1 फीट खोदे गड्ढे इसके बाद टीम ग्राम पलानी माल पहुंची। यहां बड़ी संख्या में ग्रामीण इकट्ठा हो गए और अधिकारियों को एक-एक फर्जीवाड़ा दिखाया। अब तक की जांच में तीन प्वाइंट्स सामने आए हैं, जानिए… जांच दल की सूचना मिली तो खोदा गड्ढा
ग्राम शाहपुरा माल में जांच दल के निरीक्षण के दौरान सामने आया कि वीरेंद्र मालवीय के खेत पर रिचार्ज पीट की राशि पूर्व में ही निकाली जा चुकी थी। वहीं रिचार्ज पीट मौके पर नहीं था, जांच दल की सूचना मिलते ही पंचायत सचिव ने आज सुबह ही जेसीबी मशीन से एक गड्ढा खुदवा दिया। जिसकी गहराई एक फीट ही थी। जबकि इस्टीमेट के अनुसार इस गड्ढे का साइज 10 बाय 10 का होना था। वहीं जिस जगह गड्ढा खोदा गया, वहां उसका कोई औचित्य ही नहीं था। क्या है पूरा मामला? 11 नवंबर को केंद्र सरकार ने खंडवा जिले को जल संरक्षण के लिए देश में प्रथम पुरस्कार (नेशनल वाटर अवॉर्ड) और 2 करोड़ रुपए देने का ऐलान किया था। कलेक्टर ऋषभ गुप्ता और जिला पंचायत सीईओ ने राष्ट्रपति से यह सम्मान लिया। हालांकि, पड़ताल में सामने आया कि, प्रशासन ने 1.29 लाख कामों का दावा किया, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही है। कई तालाब और स्टॉप डैम सिर्फ कागजों में हैं। पोर्टल पर अपलोड की गई कई तस्वीरें AI (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) से जेनरेटेड थीं। शाहपुरा पंचायत में 150 डक वैल (सोख्ता गड्ढे) दिखाए गए, जबकि मौके पर सिर्फ 1-2 फीट के गड्ढे या सिर्फ पाइप मिले। हरवंशपुरा में 11 तालाबों का निर्माण दिखाया गया, जो जमीन पर मौजूद ही नहीं हैं। भास्कर के खुलासे के बाद अब भोपाल की टीम इन्हीं फर्जीवाड़ों की तस्दीक कर रही है। 2-2 फीट गड्‌ढे को कुआं बताया; कलेक्टर-सीईओ का सरकारी झूठ एमपी के खंडवा जिले को सबसे ज्यादा जल संरचनाओं के निर्माण और संरक्षण के उत्कृष्ट कामों के लिए जो पहला पुरस्कार मिला है, दरअसल वो इस साल का सबसे बड़ा सरकारी झूठ है। प्रशासन ने जिन तालाबों, डक वैल और स्टॉप डैम के निर्माण का दावा किया वो हकीकत में जमीन पर मौजूद ही नहीं है… पूरी खबर पढ़ें

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