खंडवा में फ्लोराइड युक्त पानी से बच्चों के दांत पीले:युवाओं के हाथ नहीं मुड़ रहे; पीएचई ने हैंडपंपों पर लगाए लाल निशान

इंदौर में दूषित पानी से मौतों के बाद अब मध्य प्रदेश के खंडवा जिले का किल्लौद ब्लॉक चिंता का केंद्र बनता जा रहा है। यहां एक दर्जन से ज्यादा गांवों में लोग मजबूरी में फ्लोराइड युक्त पानी पी रहे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि इस पानी ने बच्चों और युवाओं की सेहत बिगाड़ दी है। कई गांवों में बच्चों के दांत पीले पड़ गए हैं, युवाओं के हाथ ठीक से नहीं मुड़ पा रहे, वहीं इंफेक्शन, जोड़ों में दर्द और कमजोरी की शिकायतें सामने आ रही हैं। ग्रामीणों ने इस गंभीर समस्या को लेकर कलेक्टर कार्यालय पहुंचकर ज्ञापन सौंपा है। ग्रामीणों के अनुसार जांच के दौरान कई गांवों में पानी में फ्लोराइड की मात्रा 2.0 से 5.0 पार्ट्स पर मिलियन (PPM) पाई गई है, जबकि सुरक्षित सीमा 1.0 पीपीएम से कम मानी जाती है। अधिक फ्लोराइड के कारण क्षेत्र में डेंटल और स्केलेटल फ्लोरोसिस के लक्षण दिखाई देने लगे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि कई लोगों को कम दिखने, दांत गिरने, बाल समय से पहले सफेद होने और लगातार जोड़ों में दर्द जैसी समस्याएं हो रही हैं। नल-जल योजना का पानी भी दूषित
किल्लौद ब्लॉक के ग्राम गरबड़ी में हालात और भी गंभीर हैं। यहां नल-जल योजना के तहत जो पानी सप्लाई हो रहा है, उसमें भी फ्लोराइड की मात्रा अधिक बताई जा रही है। गांव की करीब 3 हजार की आबादी के लिए पीने के पानी का एकमात्र स्रोत एक ही बोरवेल है, जिससे पूरे गांव में सप्लाई की जाती है। ग्रामीण बोले- इंदौर जैसी घटना न हो
ग्राम गरबड़ी के रहने वाले शिवराज सिंह सिसोदिया ने बताया कि, हमारे गांव में पानी पीने से बच्चों के दांत पीले हो रहे हैं। युवाओं के हाथों में दिक्कत है और लीवर इंफेक्शन जैसी बीमारियां बढ़ रही हैं। इंदौर जैसी घटना हमारे गांव में न हो, इसलिए कलेक्टर के पास शिकायत लेकर आए हैं। हमें साफ पानी चाहिए।”श PHE ने लगाए लाल निशान, पानी न पीने की अपील
मामला सामने आने के बाद लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग (PHE) की टीम ने प्रभावित गांवों का निरीक्षण किया। जिन हैंडपंप और ट्यूबवेल (नलकूप) में फ्लोराइड की मात्रा अधिक पाई गई, वहां लाल निशान लगाकर ग्रामीणों से पानी का उपयोग न करने की अपील की गई है। कलेक्टर बोले- ऑप्शनल व्यवस्था पर काम
खंडवा कलेक्टर ऋषव गुप्ता ने बताया कि, किल्लौद ब्लॉक के कुछ गांवों में पानी में फ्लोराइड की मात्रा अधिक पाई गई है। PHE द्वारा जांच कर दूषित जल स्रोतों पर लाल निशान लगाए गए हैं। ग्राम पंचायतों को निर्देश दिए गए हैं कि रेन वाटर हार्वेस्टिंग, तालाब और वाटर टैंक जैसे कार्य कराए जाएं, ताकि लोगों को सुरक्षित पेयजल मिल सके। ग्रामीणों का सवाल- चिह्नांकन हुआ, समाधान कब?
ग्रामीणों का आरोप है कि विभाग ने दूषित जल स्रोतों को चिह्नित तो कर दिया, लेकिन न तो उन्हें पूरी तरह बंद किया गया और न ही फिल्टर प्लांट या स्थायी शुद्ध पेयजल व्यवस्था शुरू की गई। लंबे समय से लोग फ्लोरोसिस और अन्य बीमारियों से जूझ रहे हैं, लेकिन समाधान अब तक सिर्फ कागजों तक सीमित है। यह गंभीर मामला इसलिए है कि, फ्लोराइड अधिक होने से हड्डियां कमजोर होती हैं। बच्चों की दंत संरचना प्रभावित होती हैं। लंबे समय में स्थायी अपंगता तक का खतरा।

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