भाजपा संगठन ने रविवार को हिमाचल और छत्तीसगढ़ राज्य में जिलाध्यक्षों की लिस्ट जारी कर दी है। मध्यप्रदेश में भी बेसब्री से इंतजार है, खंडवा में ज्यादा माथापच्ची नहीं है लेकिन मामला दो सक्रिय शक्ति केंद्रों से जुड़ा है। शक्ति केंद्र यानी मंत्री विजय शाह और सांसद ज्ञानेश्वर पाटिल। रायशुमारी में दोनों ने अपने-अपने समर्थक के नाम आगे बढ़ाएं हैं। हालांकि, भाजपा में यह तय हो चुका है कि अगला जिलाध्यक्ष राजपूत समाज से होगा। वजह साफ है कि नंदकुमारसिंह चौहान के निधन के बाद किसी भी राजपूत नेता को सत्ता और संगठन में जगह नहीं मिली। यही कारण है कि पैनल में राजपालसिंह तोमर, अरूणसिंह मुन्ना, राजपालसिंह चौहान और जितेंद्र मंडलोई जैसे प्रमुख नाम हैं। सांसद ने तिकड़म की बजाय चौथा नाम मंडलोई का दिया
राजपूत वर्ग से जिलाध्यक्ष के दावेदारों में प्रमुख रूप से राजपालसिंह तोमर, अरूणसिंह मुन्ना और राजपालसिंह चौहान थे। इसी बीच रायशुमारी में सांसद और उनके समर्थकों ने जिला मंत्री जितेंद्र मंडलोई का नाम आगे कर दिया। कारण तोमर, चौहान और मुन्ना की सीनियरटी थी। यह वापस सक्रिय हुए तो अगले लोकसभा और विधानसभा चुनाव में सांसद को अपने वीटो पावर पर असर होने की संभावना थी। तीन बार चूके तोमर, जिलाध्यक्ष नहीं तो सहकारिता
2011 से 2015 तक जिला पंचायत अध्यक्ष रहे राजपालसिंह तोमर के पास 10 साल से कोई दायित्व नहीं हैं। पिछली बार जिलाध्यक्ष के लिए उनके नाम की घोषणा होने वाली थी कि पार्टी में बवाल हो गया। नंदकुमारसिंह चौहान पर जातिवाद के आरोप लगाए गए। इसी बीच फैसला बदला और गुर्जर समाज से आने वाले सेवादास पटेल को जिलाध्यक्ष बनाया गया। इधर, सांसद चौहान के निधन के बाद उपचुनाव में ऐन वक्त पर टिकट पाने से चूक गए। फिर संगठन ने विधानसभा चुनाव 2023 से पहले जिला सहकारी केंद्रीय बैंक में जिलाध्यक्ष बनाने का फैसला किया। लेकिन अचानक ही नियुक्ति टाल दी गई। इस बार संगठन की ओर से जिलाध्यक्ष पद के लिए प्रमुख दावेदार हैं। हालांकि सत्ता पक्ष का सपोर्ट नहीं है। कयास यह भी है कि जिलाध्यक्ष नहीं बने तो सहकारिता में मौका मिलेगा। मंत्री समर्थक सहित अन्य दावेदार बन सकते है महामंत्री
भाजपा संगठन में यह रीत भी चली आ रही है कि जिलाध्यक्ष की दावेदारी करने वाले को महामंत्री पद मिलता है। जातीय समीकरण के हिसाब से मंत्री समर्थक संतोष सोनी, भाजपा नेता धर्मेंद्र बजाज, नानूराम मांडले, नंदन करोड़ी को महामंत्री बनाया जा सकता है। महामंत्री के अलावा अपेक्स बैंक, सहकारिता, विपणन संघ और मंडी जैसे विकल्प भी हैं।


