खबर हटके- मध्य प्रदेश को MP कहने पर केस हुआ:जर्मन सेना में जासूसी कॉकरोच की तैनाती, AI से कंट्रोल होंगे; जानिए 5 रोचक खबरें

मध्य प्रदेश के एक शख्स ने राज्य को MP या मप्र कहने पर जबलपुर हाईकोर्ट में PIL दायर कर दी। इस पर हाईकोर्ट ने शख्स से सवाल किए। वहीं जर्मनी सरकार सेना में जासूसी कॉकरोच तैनात करने की योजना बना रही है। हाल ही में मध्य प्रदेश को ‘MP’ या ‘मप्र’ कहने या लिखने पर रोक लगाने की मांग को लेकर जबलपुर हाई कोर्ट में PIL दायर की गई। इस याचिका को अदालत ने यह कहते हुए खारिज कर दिया कि बोलचाल में आसानी और समय बचाने के लिए दुनिया भर में संक्षिप्त नामों का इस्तेमाल होता है। इसलिए नाम छोटा करने से किसी जगह की पहचान नहीं बदलती, बल्कि आसान हो जाती है। दरअसल भोपाल में रहने वाले वरिंदर कुमार ने एक याचिका दायर करते हुए कहा कि उनके प्रदेश का संवैधानिक नाम ‘मध्य प्रदेश’ है, लेकिन 90% लोग बोलचाल में और 80% लोग लिखा-पढ़ी में इसके लिए ‘मप्र’ या ‘MP’ का प्रयोग करते हैं। इस पर रोक लगाने का निर्देश दिया जाना चाहिए। कोर्ट ने पूछा- इस याचिका में जनहित की कौनसी बात
चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा और जस्टिस विनय सराफ की बेंच ने याचिकाकर्ता से पूछा कि PIL में जनहित की कौन सी बात है। इस पर शख्स नहीं बता पाया कि याचिका पर विचार किए जाने से कौन सा जनहित पूरा होगा। इसके बाद अदालत ने शख्स की याचिका को खारिज कर दिया। रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद अब जर्मनी ने फ्यूचर वॉरफेयर की तैयारी शुरू कर दी है। इसके लिए जासूसी कॉकरोच और AI रोबोट तैयार किए जा रहे हैं, जिसे जल्द ही सेना में शामिल करने की तैयारी है। ऐसे में 2029 तक जर्मनी अपना डिफेंस बजट करीब तीन गुना बढ़ाकर 162 अरब यूरो (यानी ₹16.66 लाख करोड़) प्रति वर्ष करने की योजना बना रहा है। इस बजट का बड़ा हिस्सा AI रोबोट, मानव रहित मिनी-पनडुब्बियां, और जासूसी कॉकरोच भी बनाए जा रहे हैं। इस नई तकनीकी को AI से कंट्रोल करने के लिए ट्रेन किया जा रहा है। दरअसल जर्मनी का लक्ष्य यूरोप को तकनीकी रूप से डिफेंस में आत्मनिर्भर बनाना है। इस पर एक्सपर्ट्स मानते हैं कि यह कदम न केवल डिफेंस के लिए बल्कि देश की अर्थव्यवस्था और इनोवेशन के लिए भी एक बड़ा कदम है। नई दिल्ली रेलवे स्टेशन के VIP एंट्री गेट पर एक ऐसा पेड़ लगा है जिसकी कीमत ₹25 लाख होने का दावा किया जा रहा है। यह अनोखा पेड़ थाईलैंड से इम्पोर्ट किया गया है, जो एक विदेशी किस्म का है। ये पेड़ देखने में काफी अट्रैक्टिव है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस कीमती पेड़ के रखरखाव में हर महीने करीब ₹5,000 खर्च होता है। इसमें हर महीने पेड़ के लिए ₹2,500 का खास प्रोटीन आता है। यह पेड़ देश के सबसे व्यस्त स्टेशनों में से एक नई दिल्ली रेलवे स्टेशन की शोभा बढ़ा रहा है, जिसे फिलहाल अमृत भारत स्टेशनों की तर्ज पर विकसित किया जा रहा है। चीन के चेंगदू तियानफू इंटरनेशनल एयरपोर्ट के एक VIP लाउंज ने अपने एंट्री नियमों को लेकर विवाद खड़ा कर दिया है। अब लाउंज में घुसने के लिए यात्रियों को कम से कम 20 मिलियन युआन (लगभग ₹23 करोड़) की संपत्ति का सबूत दिखाना अनिवार्य कर दिया गया है। लाउंज का दावा है कि यह ‘सर्विस की क्वालिटी’ बनाए रखने के लिए है। यह मामला तब सामने आया जब एक चीनी सोशल मीडिया यूजर ने बताया कि ‘गोल्डन सनफ्लावर’ प्रोग्राम की क्लाइंट होने के बावजूद, उन्हें 20 मिलियन युआन की संपत्ति वेरिफाई करने को कहा गया है। इसमें संपत्ति और वाहन शामिल नहीं होंगे, सिर्फ फाइनेंशियल असेट ही मानी जाएगी। चीन में ये नियम जून 2024 से लागू है, जो सिर्फ तियानफू एयरपोर्ट के लिए है। यहां भीड़भाड़ ज्यादा रहती है। उत्तराखंड में एक मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने अधिकारी को अंग्रेजी न बोल पाने पर फटकार लगाई और जांच के निर्देश दिए। दरअसल, उत्तराखंड हाईकोर्ट में पंचायत वोटर लिस्ट में नाम जोड़ने को लेकर फैमिली रजिस्टर की क्रेडिबिलिटी से जुड़े एक मामले की सुनवाई चल रही थी। तभी ADM विवेक राय ने हिंदी में जवाब दिया, तो कोर्ट ने उनसे पूछा कि क्या उन्हें अंग्रेजी आती है? इस पर विवेक राय ने जवाब दिया कि वह अंग्रेजी समझ तो लेते हैं, लेकिन बोल नहीं पाते। इस पर चीफ जस्टिस जी. नरेंद्र और जस्टिस आलोक माहरा की बेंच ने सवाल उठाते हुए कहा कि क्या अंग्रेजी न जानने वाला अधिकारी इतने महत्वपूर्ण पद को अच्छे से संभाल सकता है? अब कोर्ट ने इस मामले में जांच के आदेश भी दिए हैं। कौन है ADM विवेक राय ?
विवेक राय राज्य सिविल सेवा के अधिकारी हैं और इस साल की शुरुआत में उन्हें नैनीताल के ADM पद पर तैनात किया गया था। इससे पहले वे कई जगहों पर SDM के पद पर भी तैनात रह चुके हैं। तो ये थी आज की रोचक खबरें, कल फिर मिलेंगे कुछ और दिलचस्प और हटकर खबरों के साथ… खबर हटके को और बेहतर बनाने के लिए हमें आपका फीडबैक चाहिए। इसके लिए यहां क्लिक करें…

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