खरगोन में जादू-टोने पर विश्वास कम करने और वैज्ञानिक सोच बढ़ाने के लिए शिक्षकों और छात्रों के लिए ‘जादू नहीं, विज्ञान’ विषय पर एक जिलास्तरीय कार्यशाला आयोजित की गई। इसमें भगवानपुरा, झिरन्या, भीकनगांव, गोगांवा और खरगोन तहसील के आदिवासी क्षेत्रों से चुनकर आए विद्यार्थियों ने हिस्सा लिया। बच्चों ने नाटक के जरिए दिखाया कि जो चीजें लोग जादू समझते हैं, वे दरअसल वैज्ञानिक तरीके से की जाती हैं। बच्चों को समझाया जादू का विज्ञान
विज्ञान अधिकारी दीपक कानूनगो ने बताया कि कार्यशाला में अलग-अलग वैज्ञानिक प्रयोगों से समझाया गया कि चमत्कार जैसी कोई चीज नहीं होती। जिन चीजों को लोग जादू मानते हैं, उनके पीछे भी वैज्ञानिक कारण होते हैं। उन्होंने कहा कि जादू के नाम पर लोगों को ठगने वालों से बचने के लिए वैज्ञानिक जागरूकता जरूरी है। कार्यक्रम की शुरुआत में जिला शिक्षा अधिकारी एस.के. कानुड़े ने कहा कि दुनिया में असली जादू कुछ नहीं है। तांत्रिक, ओझा और बड़वा जैसे लोग रसायनों और ट्रिक्स का इस्तेमाल करके लोगों को धोखा देते हैं। इसलिए हर किसी को विज्ञान के आधार पर सोचने की जरूरत है। कार्यशाला में छात्रों से अपील की गई कि वे वैज्ञानिक सोच को अपने घर और आसपास के लोगों तक पहुंचाएं। क्रीड़ा निरीक्षक हबीब बेग मिर्जा ने बताया कि नाटक के माध्यम से अंधविश्वास छोड़ने का संदेश भी दिया गया। इस मौके पर सहायक संचालक सोनालिका अचाले और कई शिक्षक मौजूद रहे।


