खिचड़ी भोग : श्री लक्ष्मी नारायण मंदिर के तीनों दरबारों का अलग-अलग स्वांग रचा

पौष मास के महीने में दुर्ग्याणा तीर्थ में खिचड़ी भोग चल रहा है। रविवार को खिचड़ी भोग में मंदिर के सभी विग्रहों का अदभुत शृंगार किया। मंदिर के मुख्य पुजारी ओम प्रकाश और अन्य पुजारियों ने मिलकर श्री लक्ष्मी नारायण मंदिर के तीनों दरबारों में अलग-अलग स्वांग रचा। दुर्ग्याणा कमेटी की अध्यक्षता में रचे स्वांग को देखने भक्तजन पहुंचे। राम दरबार : भगवान श्री राम नदी पार करने खेवट को आवाज लगाते हैं। खेवट जब आकर देखते हैं तो वहां प्रभु श्री राम माता सीता और लक्ष्मण के साथ नदी पार करने का आग्रह खेवट से करते हैं। खेवट प्रभु को अपनी नांव में बैठाकर नदी पार करवाते हैं। इसी का स्वांग राम दरबार में रचा गया।
कृष्ण दरबार : कृष्ण दरबार में सुदामा अपने दोस्त से मिलने पहुंचे। इसका पता जब भगवान श्री कृष्ण को चला तो वह नंगे पैर अपने सखा से मिलने दौड़े चले आते हैं। कहते हैं कि भगवान श्री कृष्ण ने अपने सखा सुदामा के मुट्ठी भर चावल के बदले काफी कुछ दे डाला था। वहीं कृष्ण दरबार में सुदामा और कृष्ण के मिलने का दृश्य था। श्री लक्ष्मी नारायण दरबार: तीर्थ के मुख्य श्री लक्ष्मी नारायण दरबार में भगवान नारायण जी को कूर्म अवतार यानि (कछुआ) का रूप धारण करवाया। क्षीरसागर के दौरान समुद्र मंथन में नारायण जी ने कूम अवतार लेकर मंदार पर्वत को अपनी पीठ पर संभाला था। पंडितों ने भगवान नारायण जी का कूर्म अवतार धारण करवाया। खिचड़ी भोग 12 जनवरी तक चलेगा। जिसमें भगवान के अलग-अलग स्वांग रचे जाते हैं ताकि हिंदुओं को इतिहास के बारे पता चल सके।

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