खिजुरिया टोली के लोगों का दर्द:बर्बाद होने की कहानी बयां कर रहीं डबडबाई आंखें

जिस घर को बनते देखा था, अब उसी की ईंट-ईंट अलग होते देखी
हाड़ कंपाने वाली ठंड, आशियाना टूटने का गम और आंखों में भविष्य की चिंता आनंदम अपार्टमेंट से चंद कदम आगे चारों ओर बिखरे ईंट, खिड़की-दरवाजे उसके बीच में बैठी तीन महिलाएं और बच्चे पूरी तरह नि:शब्द हैं। इनमे सबसे उम्रदराज महिला की डबडबाई नजर उन ईंटों पर टिकी हैं, जिसे वर्षों पहले उसने जोड़ा था। पूछने पर वह अपना नाम विलासो देवी बताती हैं। कहती है अब सब बर्बाद हो गया, मेरा घर उजड़ गया, हमलोग पूरा परिवार रोड पर आ गए। अब आप क्या करने आएं हैं। यह बताने पर कि हमलोग प्रेस से हैं, अब दोषी अफसरों पर केस दर्ज हो गया है। यह सुनकर वह लंबी सांस लेती हैं। कहती हैं, क्या बताएं बाबू 40 साल पहले रोड एक्सिडेंट में पति की मौत हो गई। चार छोटे बच्चे थे। रिम्स के पास होटल चलाकर उन्हें पाल रही थी। इसी बीच यहां आठ डिसमील जमीन ली। सात हजार रुपए प्रति डिसमिल की दर से पैसे देकर एग्रीमेंट कराए। इसके बाद कई साल लगे घर बनाने में। इस बीच एक लड़का और एक लड़की की मौत हो गई। अब एक बेटी-बेटा मेरे साथ है। मुझे नहीं पता था कि यह जमीन सरकार ले ली थी। प्रशासन से ठंड में कुछ समय देने की मांग की गई, लेकिन सीओ बोलते हैं कोई सुनवाई नहीं होगी। घर तोड़ दिया। अब पांच हजार रुपए प्रतिमाह किराए पर सामने ही घर लिए हैं। लेकिन जगह कम है। भविष्य कैसे संवरेगा भगवान ही मालिक है। लखमनी कुजूर कहती हैं…
जमीन किसी की, मुआवजा किसी और ने लिया, अब कैसे होगा गुजारा
खिजूरिया टाेली में ही एक ओर चाराें ओर बिखरे ईंट काे सहेज रही लखमनी कुजूर कहती हैं कि वह 18 साल की उम्र से यहां रह रही है। कहती हैं कि ये जमीन मेरे भाई महादेव बड़ाईक की खतियानी थी। रिम्स ने जब जमीन को अधिग्रहण किया था उस समय उन्हें पता नहीं था कि मुआवजा भी बना है। अब जब हमारा घर तोड़ दिया गया और हम लोगों ने पता लगाया तो जानकारी मिली कि हमारी 93 डिसमिल जमीन के लिए 11,740 रुपए 58 पैसे मुआवजा बना था। मुआवजा भी 17 जून 1971 को किसी और ने ले लिया था। जिस व्यक्ति ने मुआवजा लिया वह भी उसी जमीन के एक टुकड़े पर है, लेकिन उस पर काेई कार्रवाई नहीं हुई। अब घर टूटने के बाद, पास के ही एक घर में चार हजार प्रति माह पर एक कमरा लिए हैं। उसमें खिड़की तक नहीं है। किसी तरह चादर लगाकर पूरा परिवार रह रहे हैं। अब आगे कैसे गुजारा हाेगा किसी काे नहीं पता। दाे दिन से ताे काेई खाना नहीं खाया है। सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई से पहले ही प्रशासन ने तोड़ दिया घर
सुप्रीम काेर्ट में सुनवाई से एक दिन पहले प्रशासन ने जबरन ताेड़ा कैलाश काेठी डीआईजी ग्राउंड के पास सबसे चर्चित घर रहा कैलाश काेठी। प्रशासन ने एक दिन पहले ही उसे जबरन ताेड़ दिया। बिखरे ईंट के साथ बिखरे सपने और दाे बेटियाें के हाथ पीले करने की चिंता में राजकुमारी देवी की आंखाें से आंसू थम नहीं रहे हैं। क्याेंकि, पति मानसिक रूप से विक्षिप्त हैं। राजकुमारी कहती है जमीन के सभी कागजात उनके पक्ष में है। सुप्रीम काेर्ट में एसएलपी भी दाखिल हाे गई थी। मंगलवार काे सुनवाई हाेनी थी, लेकिन बड़गाई सीओ ने साेमवार काे जबरन घर ताेड़ दिया। अब सुप्रीम काेर्ट ने स्टे लगा दिया है। प्रशासन काे भी इससे संबंधित नाेटिस भेज दिया गया है। किसी तरह बहन के घर में रह रही हूं।

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