खुद हुए बेसहारा; आश्रयगृहों का फंड कहीं 8 तो कहीं 36 माह से बंद

रांची सहित राज्य के अन्य जिलों में स्थित आश्रयगृह में रहने वाले बच्चों को भोजन-पानी, दवा आदि के लिए समय पर फंड नहीं मिल रहा है। बेसहारा बच्चों व महिलाओं को आश्रय देने वाला खुद बेसहारा हो गया है। कहीं 11 माह तो कहीं 36 माह से फंड नहीं मिला है। फंड के अभाव में बच्चों के भोजन-दवा सहित अन्य जरूरतें उधार के जुगाड़ से पूरी हो रही हैं। जिन स्वयंसेवी संस्थाओं को आश्रयगृह के संचालन की जिम्मेदारी दी गई है, अब वे भी हाथ खड़े कर चुके हैं। क्योंकि, जिन राशन दुकानों से खाद्यान्न की आपूर्ति हो रही है, वह भी उधार में है। इन आश्रयगृहों का संचालन केंद्र और राज्य सरकार फंड से होता है। केंद्र सरकार द्वारा इस मद में पूर्व में जो फंड दिया गया था, उसका राज्य सरकार ने उपयोगिता प्रमाणपत्र नहीं दिया। इस वजह से केंद्र ने नया फंड रोक दिया। ऐसे में राज्य सरकार भी अपने हिस्से का फंड जारी नहीं कर सकी। इसका खामियाजा आश्रयगृह में रहने वाले बच्चों को भुगतना पड़ रहा है। बच्चों को कभी पतली दाल मिल रही है तो कभी सिर्फ चावल-दाल, भुजिया। किसी बच्चे की तबीयत बिगड़ जाए तो उसे दवा भी उधार में लाकर देनी पड़ रही है। सबसे बड़ी बात है कि इन आश्रयगृह के संचालन की जिम्मेदारी जिन कर्मचारियों के ऊपर है, उन्हें भी 11 माह से मानदेय नहीं मिला है। एक तो पैसे कम, वह भी समय पर नहीं मिलता, कैसे हो गुजारा आश्रयगृह में रह रहे बच्चों के भोजन से लेकर दवा सहित अन्य जरूरतों की पूर्ति के लिए रोजाना 100 रुपए दिए जाते हैं। संचालक एजेंसी को उसी पैसे में सब कुछ मैनेज करना है। कितने बच्चे हैं, उस आधार पर पैसे का भुगतान किया जाता है। आश्रयगृह संचालकों ने नाम नहीं छापने की शर्त पर बताया कि सिर्फ खाना और दवा की बात नहीं है। खाना बनाने के लिए रसोई गैस, बर्तन सहित अन्य सामग्री की जरूरत पड़ती है। एक तो पैसे कम, वह भी समय पर नहीं मिलता, ऐसे में गुजारा कैसे होगा। विभाग से जब भी मांगा फंड तो मिला सिर्फ और सिर्फ आश्वासन दूसरी ओर सभी जिलों ने फंड देने को लेकर विभाग को कई बार पत्र भेजा, लेकिन सिर्फ आश्वासन मिला। दरअसल, आश्रयगृह में ट्रैफिकिंग, घरेलू हिंसा, बाल श्रम से मुक्त कराए गए 18 साल तक के बच्चों को रखा जाता है। इनका संचालन जिला स्तर पर बाल संरक्षण कमेटी की आेर से किया जाता है। लेकिन कमेटी द्वारा सभी आश्रयगृहों को एनजीआे के माध्यम से संचालित किया जा रहा है। लंबे समय से इसी व्यवस्था के तहत आश्रयगृहों का संचालन हो रहा है। केंद्र से फंड मिलते ही जिलों को आवंटित किया जाएगा राज्य सरकार प्रयास कर रही है। केंद्र सरकार से फंड मिलने का इंतजार किया जा रहा है। अब तक केंद्र सरकार से मिले फंड का उपयोगिता प्रमाण पत्र भी भेजा जा चुका है। इसके बाद से अबतक कोई फंड केंद्र की ओर से जारी नहीं की गई है। थोड़ी देर अवश्य हो रही है, लेकिन जल्द फंड मिल जाने की सं‍भावना है। केंद्र सरकार से फंड मिलते ही सभी संबंधित जिलों को जल्द से जल्द आवंटित कर दिया जाएगा। -मनोज कुमार, सचिव, महिला बाल विकास एवं सामाजिक सुरक्षा विभाग

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