खैरथल में निरंकारी मिशन का विशेष सत्संग:नव वर्ष पर प्रेम, शांति और मानवता का संदेश दिया गया

खैरथल में संत निरंकारी मिशन द्वारा स्थानीय निरंकारी भवन में एक विशेष सत्संग का आयोजन किया गया। इस सत्संग में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लिया और नव वर्ष का आध्यात्मिक रूप से स्वागत किया। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य नव वर्ष पर आत्म-सुधार,सेवा और मानवता के मूल्यों को जीवन में अपनाने का संदेश देना था। मीडिया सहायक कविता आहूजा ने बताया कि इस विशेष सत्संग में अलवर से आए प्रचारक महात्मा अमृत खत्री मंचासीन रहे। उन्होंने भक्तों को संबोधित करते हुए कहा कि नव वर्ष केवल कैलेंडर बदलने का अवसर नहीं है, बल्कि पुराने अनुभवों से सीख लेकर स्वयं को बेहतर बनाने का संकल्प लेने का समय है। महात्मा खत्री ने जोर दिया कि यदि हम मानवीय गुणों को अपनाकर परमात्मा के ज्ञान को अपने आचरण में उतारें,तो समाज में सकारात्मक परिवर्तन संभव है। उन्होंने प्रेम,सेवा और समर्पण के भाव से मानवता की सेवा करने पर बल दिया। उनके अनुसार,आत्म-सुधार, सेवा,सुमिरण और संगत जीवन को परमात्मा की ओर उन्मुख करने के सशक्त माध्यम हैं। उन्होंने सेवा के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि सच्ची सेवा वही करवा सकता है,जो स्वयं सेवा के भाव को जीता हो। महात्मा खत्री ने शबरी का उदाहरण देते हुए बताया कि उनके निष्कपट भाव और अटूट विश्वास से प्रभु राम स्वयं उनकी कुटिया में आए, जिससे जाति-पाति की सभी दीवारें टूट गईं। उन्होंने कहा कि आज के सतगुरु भी समाज में इसी समानता और मानव-एकता का संदेश देते हैं। महात्मा खत्री ने यह भी कहा कि जब हम सतगुरु की नाव में बैठते हैं,तो वह कभी नहीं डूबती, क्योंकि उसकी पतवार स्वयं सतगुरु के हाथ में होती है। सत्संग में नव वर्ष को पुरानी कमियों को दूर कर अच्छाइयों को अपनाने और परमात्मा के प्रेम को अनुभव कर सार्थक जीवन जीने के अवसर के रूप में देखने का संदेश दिया गया। अंत में, महात्मा खत्री ने सभी श्रद्धालुओं के लिए सुख, समृद्धि और आनंदमय जीवन की शुभकामनाएं दीं। इस अवसर पर खैरथल के मुखी महात्मा सहित अन्य भक्तजनों ने भी नव वर्ष का संदेश देते हुए संत निरंकारी मिशन के सिद्धांतों-‘एक निरंकार’ में विश्वास और मानव-एकता-को आत्मसात करने का आह्वान किया।

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