ख्याति हॉस्पिटल स्कैंडल की जांच फर्जी आयुष्मान कार्ड तक पहंची:जालसाज सरकारी वेबसाइट में हेरफेर कर महज 15 मिनट में कार्ड तैयार कर देते थे

अहमदाबाद के चर्चित ख्याति हॉस्पिटल स्कैंडल में फर्जी आयुष्मान कार्ड बनाने के घोटाले का भी पर्दाफाश हुआ है। अहमदाबाद क्राइम ब्रांच की जांच में खुलासा हुआ है कि जालसाज सरकारी वेबसाइट में हेरफेर कर महज 15 मिनट में लोगों के फर्जी आयुष्मान कार्ड बना देते थे। इस मामले में पुलिस ने 10 आरोपियों को अरेस्ट किया है। 1 से 2 हजार रुपए में तैयार कर देते थे कार्ड
जालसाज उन लोगों को निशाना बनाते थे, जिनके पास कार्ड बनवाने का ज्यादा समय नहीं होता था। या फिर ऐसे लोग, जिनके पास पर्याप्त दस्तावेज नहीं होते थे या उनसे आयुष्यमान कार्ड के मानदंडों पूरे नहीं होते थे। जालसाजों इन लोगों के फर्जी आयुष्यमान कार्ड बनाने के लिए सरकारी वेबसाइट की मास्टर आईडी का उपयोग करते थे। क्राइम ब्रांच के पुलिस आयुक्त का कार्ड बनाकर दिखाया
जब इस पूरे मामले का खुलासा हुआ तो अहमदाबाद क्राइम ब्रांच को भी यकीन नहीं हुआ। इसकी पुख्ता जानकारी इकट्ठा करने के लिए जांच टीम ने अपने सामने बिठाकर उनसे कार्ड बनाकर दिखाने को कहा। इस पर महज 15 मिनट में ही जालसाजों ने क्राइम ब्रांच के संयुक्त पुलिस आयुक्त शरद सिंगल का फर्जी आयुष्मान कार्ड बनाकर दिखा दिया। जांच में यह भी पता चला है कि यह पूरा घोटाला देशव्यापी है और इसमें यूपी, बिहार और गुजरात समेत अन्य राज्यों के लोग भी शामिल हैं। इस तरह तैयार किए जा रहे हैं आयुष्मान कार्ड
सबसे पहले पीएमजेएवाई कार्ड के मापदंड के अंतर्गत आने वाले लोगों का डेटा आउटसोर्सिंग वेबसाइट पर अपडेट किया जाता है।
जालसाजों के पास छह से सात मास्टर आईडी थे। मास्टर आईडी की मदद से वे वेबसाइट के सोर्स कोड को एडिट करते थे और एक्सेस हासिल करते थे।
जिन लोगों के पास पहले से ही कार्ड था, उनके पारिवारिक विवरण में बिना कोई दस्तावेज अपलोड किए नया नाम जोड़ देते थे।
जो लोग पात्र थे, उनकी जानकारी के बिना वेबसाइट में सब कुछ अपडेट कर उन्हें फैमिली आईडी दे देते थे।
आधार कार्ड की डिटेल परिवार की आईडी से मेल खाने के बाद मात्र 15 से 20 मिनट में आयुष्मान कार्ड एनएफएस पोर्टल पर उपलब्ध करा देते थे। गौरतलब है कि यह पूरा मामला संज्ञान में आने के बाद अहमदाबाद क्राइम ब्रांच ने आयुष्मान कार्ड संस्था को इस वेबसाइट के बारे में जानकारी देकर वेबसाइट को तुरंत बंद करने का निर्देश दिया है। आरोपी हर महीने 40 से 50 हजार रुपये कमाते थे
अहमदाबाद क्राइम ब्रांच ने इस घोटाले में छह लोगों को गिरफ्तार किया है। आरोपी फर्जी कार्ड बनाकर हर महीने 40 से 50 हजार रुपए कमा लेते थे। सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक फिलहाल इस रैकेट में 11 लोगों के शामिल होने का पता चला है। क्राइम ब्रांच की टीम इस मामले में अभी और आरोपियों तक पहुंचने की कोशिश कर रही है। साथ ही मास्टर आईडी प्रोवाइडर का भी पता लगाने की कोशिश की जा रही है। साफ है कि मास्टर आईडी प्रोवाइडर को इस पूरे रैकेट की जानकारी है। ख्याति हॉस्पिटल को दिए थे 150 कार्ड
क्राइम ब्रांच के सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक आरोपियों ने ख्याति हॉस्पिटल को भी ऐसे ही फर्जी 150 कार्ड दिए थे। इनमें अहमदाबाद जिले के उस गांव के कुछ लोग भी शामिल हैं, जो ख्याति अस्पताल स्कैंडल का शिकार हुए थे। अब जानिए, क्या है ख्याति स्कैंडल
बीते 11 नवंबर को अहमदाबाद के ख्याति अस्पताल में 19 मरीजों की एंजियोग्राफी और 7 मरीजों की एंजियोप्लास्टी की गई थी। जिनमें से 2 मरीजों की मौत हो जाने के बाद इसकी जांच शुरू की गई है। अस्पताल के डॉक्टर और निदेशक समेत पांच लोगों के खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है। 19 लोगों की जान खिलवाड़ करने वाले डॉ. प्रशांत वजीरानी को भी गिरफ्तार कर लिया गया है। जांच में पता चला है कि पीएम आयुष्मान भारत योजना के पैसे ऐंठने के लिए ये पूरा षड़यंत्र रचा गया था। फर्जी आयुष्मान कार्ड केस में पकड़े गए आरोपियों के नाम
कार्तिक पटेल, अहमदाबाद
चिराग राजपूत, अहमदाबाद
निमेश डोडिया, अहमदाबाद
मोहम्मद फजल शेख, अहमदाबाद
मोहम्मद अस्पाक शेख, अहमदाबाद
नरेंद्र सिंह गोहिल, भावनगर
इम्तियाज, भावनगर
रशीद, बिहार
इमरान जाबिर हुसैन कारीगर, सूरत
निखिल पारेख, अहमदाबाद अहमदाबाद के ख्याति स्कैंडल की पूरी खबर पढें.. आयुष्मान राशि की लालच में 17 मरीजों की एंजियोग्राफी, दो की मौत, 5 ICU में अहमदाबाद के एक निजी अस्पताल ने 7 मरीजों की एंजियोप्लास्टी कर दी। हैरानी की बात यह है कि इसके लिए मरीजों की परमिशन भी नहीं ली गई। एंजियोप्लास्टी के बाद 2 मरीजों की मौत हो गई। 5 मरीज फिलहाल आईसीयू में भर्ती हैं। मृतक मरीजों के परिजन का कहना है कि दोनों ही पूरी तरह स्वस्थ थे। पूरी खबर पढ़ें…

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