माघ मेला के अंतर्गत संस्कृति विभाग, उत्तर प्रदेश द्वारा आयोजित कला संगम सांस्कृतिक संध्या का आयोजन गंगा पंडाल, सेक्टर-3 परेड ग्राउंड में भव्य रूप से किया गया। कार्यक्रम में देश के प्रख्यात कलाकारों की शास्त्रीय संगीत, लोकगीत और नृत्य नाटिकाओं ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। कार्यक्रम की शुरुआत प्रयागराज के प्रशांत मिश्रा व साथियों द्वारा सुंदरकांड के पाठ से हुई। इसके बाद मध्य प्रदेश के मैहर से आए उत्तम पांडेय और उनकी टीम ने नल तरंग, सितार, तबला और संतूर के माध्यम से बाबा उस्ताद अलाउद्दीन खां की परंपरा को आगे बढ़ाते हुए राग यमन की प्रभावशाली प्रस्तुति दी। दर्शकों की मांग पर मैहर बैंड ने “रघुपति राघव राजा राम” की प्रस्तुति भी दी, जिसे खूब सराहा गया। वाराणसी से आईं विख्यात शास्त्रीय गायिका सुचारिता गुप्ता ने राग खमाज ठुमरी, दादरा और गंगा महिमा से जुड़ी रचनाओं की मनमोहक प्रस्तुति दी। उनकी गायकी पर श्रोता देर तक तालियां बजाते रहे। लखनऊ की प्रसिद्ध लोकगायिका रंजना रजिता मिश्रा ने अवधी और भोजपुरी लोकगीतों से माहौल को जीवंत कर दिया। सोहर गीत “गोकुल में बजेला बधइया” पर दर्शक विशेष रूप से झूम उठे। लोकनृत्य की प्रस्तुति में मथुरा के कलाकार गीत कृष्ण शर्मा ने बृज लोक पर आधारित मयूर लोक नृत्य “मोर बन आयो रसिया” प्रस्तुत कर खूब वाहवाही लूटी। वहीं राम मोहन महाराज की टीम ने शिव स्तुति पर आधारित कथक नृत्य नाटिका प्रस्तुत कर दर्शकों को भावविभोर कर दिया। सभी नृत्य प्रस्तुतियां लखनऊ घराने की पारंपरिक तीन ताल में रहीं। कार्यक्रम का सफल मंच संचालन संजय पुरुषार्थी ने किया। अंत में सभी कलाकारों को संगीत नाट्य अकादमी के निदेशक शोभित नाहर, क्षेत्रीय ललित कला अकादमी के निदेशक देवेंद्र त्रिपाठी और नोडल अधिकारी गुलाम सरवर द्वारा अंगवस्त्र और प्रमाण पत्र देकर सम्मानित किया गया।


