छिंदवाड़ा में न्यूटन नगर परिषद क्षेत्र में दूषित पानी की सप्लाई ने लोगों का जीना मुश्किल कर दिया है। नलों से लगातार गंदा, बदबूदार और काला पड़ चुका पानी आ रहा है, जिससे लोग पेट और त्वचा संबंधी बीमारियों का शिकार हो रहे हैं। हालात इतने गंभीर हो गए कि मंगलवार से भाजपा कार्यकर्ता नगर परिषद कार्यालय के सामने क्रमिक भूख हड़ताल पर बैठ गए। बुधवार को अनशन का यह दूसरा दिन रहा। अधिकारियों के आश्वासन के बाद भी समस्या जस की तस अनशन की जानकारी मिलने पर नगर परिषद और जल विभाग के अधिकारी मौके पर पहुंचे। उन्होंने समस्या को स्वीकार करते हुए जल्द समाधान का भरोसा दिया।सीएमओ प्रभारी रोशन बाथम ने कहा—पानी सप्लाई की समस्या का स्थायी समाधान शुक्रवार तक कर दिया जाएगा, लेकिन आश्वासन अनशनकारियों को पर्याप्त नहीं लगा। उनका कहना है कि कई बार वादे हुए, लेकिन स्थिति जस की तस बनी रही। इसलिए धरना जारी रखने का निर्णय लिया गया। कोयला खदान का दूषित पानी, लोगों की परेशानी बढ़ी स्थानीय निवासियों का आरोप है कि जिस स्रोत से पानी नगर तक पहुंचता है, वहां कोयला खदानों का दूषित पानी मिल रहा है। निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने भी स्वीकार किया कि नदी में एक स्थान ऐसा है जहां कोयला मिश्रित पानी आकर मिलता है। फिलहाल उसे अस्थायी बैरिकेडिंग कर रोक दिया गया है और फ़िल्टर प्लांट के जरिए पानी को शुद्ध कर सप्लाई बहाल करने की कोशिश की जा रही है। पहले दो बच्चों की मौत हो चुकी कुछ दिन पहले न्यूटन क्षेत्र में दो बच्चों की मौत के बाद पेयजल की गुणवत्ता को लेकर बड़ी बहस छिड़ी थी। तब स्वास्थ्य विभाग ने पानी की जांच भी कराई थी। लेकिन अब फिर दूषित पानी की समस्या सामने आने से इलाके में गुस्सा और चिंता दोनों बढ़ गए हैं। लोगों का कहना है कि जब तक साफ और सुरक्षित पानी उपलब्ध नहीं कराया जाता, उनका आंदोलन जारी रहेगा। कोयला खदान और नदी का दूषित पानी बना परेशानी स्थानीय लोगों का कहना है कि जिस स्रोत से पानी नगर में पहुंच रहा है, उसमें कोयला खदान के दूषित पानी के मिलने की आशंका है।अधिकारियों ने निरीक्षण के दौरान बताया कि नदी में जिस स्थान से कोयला मिश्रित पानी आकर मिलता था, उसे अस्थायी रूप से बैरिकेडिंग (बाल) लगाकर रोका गया है। फिल्टर प्लांट के माध्यम से शुद्ध पानी पाइपलाइन में भेजने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। बच्चों की मौत के बाद भी उठे थे सवाल कुछ दिन पहले न्यूटन क्षेत्र में दो बच्चों की मौत हुई थी, जिसके बाद स्थानीय लोगों ने पेयजल की गुणवत्ता पर सवाल खड़े किए थे। स्वास्थ्य विभाग ने तब पानी की जांच भी कराई थी।अब एक बार फिर दूषित पानी का मुद्दा क्षेत्र में गर्म है और लोग साफ पानी की मांग को लेकर आवाज बुलंद कर रहे हैं।


