भास्कर न्यूज | गढ़वा सदर अस्पताल में बच्चों के लिए बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं का दावा किया जाता है, लेकिन हकीकत इससे बिल्कुल उलटा है। जिला अस्पताल में सामान्य बीमारियों से ग्रसित बच्चों को भर्ती करने के लिए कोई बाल चिकित्सा वार्ड नहीं है। पेट दर्द, उल्टी और बुखार से पीड़ित बच्चों को वयस्कों के साथ सर्जिकल वार्ड में भर्ती किया जाता है, जिससे उनकी परेशानियां और बढ़ जाती हैं। अस्पताल की स्थापना को कई वर्ष बीत चुके हैं, लेकिन बढ़ती आबादी के साथ स्वास्थ्य सुविधाओं का विस्तार नहीं हो सका। वर्तमान में अस्पताल में इमरजेंसी, वरिष्ठ नागरिक वार्ड, आईसीयू, डेंगू वार्ड, बर्न यूनिट, कंगारू मदर केयर यूनिट और शिशु वार्ड जैसी बुनियादी सुविधाओं का अभाव है। इसके चलते कई बार चिकित्सकों को मजबूरी में बच्चों को जनरल वार्ड में भर्ती करना पड़ता है, जिससे मरीजों को आर्थिक शोषण झेलना पड़ता है। अस्पताल की अव्यवस्थित व्यवस्था के कारण हर दिन करीब 25 से 30 बच्चे भर्ती रहते हैं। लोआ दाग निवासी अक्षय कुमार भारती की 1.5 वर्षीय पुत्री स्वीटी भारती और गढ़वा थाना क्षेत्र के सोनपुरा निवासी मो. असलम खान का 10 वर्षीय पुत्र आदिल खान ब्लड संबंधी समस्या से पीड़ित थे, लेकिन उनके परिजनों को मजबूरी में सर्जिकल वार्ड में ही इलाज कराना पड़ा। परिजनों ने जब बच्चों के लिए अलग वार्ड की मांग की, तो अस्पताल स्टाफ ने उन्हें यही वार्ड में इलाज कराने को कहा। बड़े रोगियों के साथ भर्ती होने के कारण बच्चों की मनोदशा पर बुरा प्रभाव पड़ रहा है, लेकिन अस्पताल प्रशासन इस ओर ध्यान नहीं दे रहा है। इस संबंध में उपाधीक्षक हरेन चंद्र महतो ने बताया कि सदर अस्पताल में फिलहाल शिशु वार्ड नहीं है, लेकिन इसके निर्माण का आदेश मिल चुका है और जल्द ही इसका निर्माण कर इसे चालू किया जाएगा।


