कबीरधाम जिले में इन दिनों गन्ना की फसल में कीट का प्रकोप अचानक से बढ़ गया है। इस कीट का नाम तनाछेदक है, जो किसानों के लिए सिरदर्द बन गया है। इस कीट के प्रभाव से शुरुआती दिनों का गन्ना खत्म हो रहा है। क्योंकि ये गन्ने के तने में रहता है, जो भीतर-भीतर तने को खा रहा है। ऐसे में गन्ना के उत्पादन पर अपने वाले समय में असर पड़ सकता है। जिले के अधिकतर क्षेत्र में इस कीट का प्रकोप दिखाई दे रहा है। इस कीट की रोकथाम को लेकर अब जिले के कृषि विभाग ने कोई पहल नहीं की है। अब तक विभाग ने किसानों के लिए एडवाइजरी तक जारी नहीं की है। आमतौर पर फसल में कीट-पतंग की शिकायत सामने आने के बाद कृषि विभाग एडवाइजरी जारी करता है। साथ ही फसल का सर्वे भी किया जाता है। लेकिन कृषि विभाग ने अब तक इस खतरनाक कीट के संबंध में कोई जानकारी तक नहीं दी है। यही कारण है कि परेशान किसान अपने हिसाब से कृषि दुकानों से दवा खरीदकर छिड़काव कर रहे हैं। गन्ना किसान उमेश वर्मा ने बताया कि उनके खेत में लगी गन्ने की फसल में यह कीट दिखाई दिया है। इससे फसल को नुकसान हुआ है। इसके बचाव को लेकर अब तक कृषि विभाग के कोई भी अधिकारी ने सलाह नहीं दी है। उन्होंने बताया कि अधिकतर क्षेत्र में इस कीट का प्रभाव है। कृषि विभाग के उपसंचालक अमित मोहंती ने कहा कि आपके माध्यम से कीट के बारे में जानकारी मिली है। जिले के सभी कृषि अधिकारियों को फील्ड में विजिट के निर्देश दिए गए हैं। वर्तमान में कीट के संबंध में कोई शिकायत नहीं आई है। फिर भी हम जानकारी लेंगे। किसानों को इस कीट की रोकथाम को लेकर सलाह देंगे। पूरे प्रदेश में सबसे ज्यादा गन्ना केवल कबीरधाम जिले में होता है। बीते सीजन में करीब 35 हजार हेक्टेयर में गन्ने की फसल ली गई थी। जिले में बीते 5 साल से न्यूनतम 30 हजार हेक्टेयर में गन्ना की खेती की जाती है। अच्छे उत्पादन की उम्मीद में रकबा बढ़ा, अब समस्या इस बार जिले में गन्ने का रकबा बढ़ने वाला है। क्योंकि बीते सीजन में निजी गुड़ फैक्ट्री में गन्ना का रेट प्रति क्विंटल 450 रुपए तक गया है। आने वाले सीजन में इसी उम्मीद के कारण किसानों ने अपने गन्ना का रकबा बढ़ा दिया है। इस बीच शुरुआती दिनों में गन्ने में कीट आने से किसानों को परेशानी हो रही है। गन्ना किसानों ने बताया कि वर्तमान में गन्ना का ग्रोथ होना है। ऐसे समय में गन्ना का शुरुआती तना ही सूख रहा है। इससे उत्पादन कमजोर होगा।


