गरियाबंद के परसदा जोशी के घाट पर दो खदानों की लीज की अवधि समाप्त होने के बावजूद अवैध खनन अभी भी जारी है। इस अवैध खनन पर 4 करोड़ 25 हजार रुपए का जुर्माना तय किया गया था। माइनिंग विभाग ने अक्टूबर 2024 में जुर्माने की राशि जमा करने का पत्र जारी किया था, लेकिन अब तक 4 करोड़ रुपए की वसूली नहीं हो सकी। राजस्व और माइनिंग विभाग ने संयुक्त निरीक्षण के बाद इस अवैध खनन पर जुर्माना तय किया था। बतादें कि मामले में तत्कालीन पट्टेदार संकल्प जंघेल, तत्कालीन सरपंच सुनीता सोनी, पंच बेनराज सोनी, हार्दिक सोनवानी को दोषी ठहराया गया था। बतादें कि परसदा जोशी के घाट पर नवंबर 2021 से नवंबर 2023 तक दो खदानों की लीज मंजूर की गई थी। लीज की अवधि समाप्त होने के बावजूद एक खदान में 80 हजार घन मीटर रेत का अवैध उत्खनन किया गया। इस मामले को भाजपा सरकार के पहले विधानसभा सत्र में ही विधायक धर्मलाल कौशिक और राजेश मूणत ने जोर-शोर से उठाया, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। हम दोषी नहीं, इसलिए अपनी बात रख रहे हैं – पूर्व सरपंच पति इस मामले में दोषी ठहराए परसदा जोशी के तत्कालीन सरपंच के पति बेनराज सोनी ने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि लीज खत्म होने के बाद अवैध खनन की सूचना पंचायत द्वारा लगातार राजस्व और माइनिंग विभाग को दी गई थी। उनका कहना है कि कार्रवाई करना प्रशासन की जिम्मेदारी थी, लेकिन उन्होंने कोई कदम नहीं उठाया। अब जब जांच हुई, तो हमें ही दोषी ठहरा दिया गया, जो गलत है। उन्होंने प्रशासन को लिखित जवाब भी सौंपा है। महासमुंद सांसद ने संसद में उठाया था अवैध खनन का मामला महासमुंद की सांसद रूप कुमारी चौधरी ने 19 मार्च को संसद में यह मुद्दा उठाया था। उन्होंने नियम 377 के तहत राजिम क्षेत्र, महासमुंद और धमतरी जिले में हो रहे अवैध खनन का मामला रखा। सांसद ने चिंता जताई कि अवैध खनन से महानदी का अस्तित्व खतरे में है। इससे क्षेत्र का पारिस्थितिक तंत्र भी प्रभावित हो रहा है। माइनिंग विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं। विभाग न तो अवैध खनन रोक पा रहा है और न ही तय जुर्माने की वसूली कर पा रहा है। गरियाबंद जिले में महानदी के पीतई बंद, कोपरा, तर्रा और परसदा जोशी जैसे कई घाटों में दिन-रात अवैध खनन जारी है। साहब का मोबाइल हमेशा बिजी रहता है
अवैध खनन की शिकायतों के लिए माइनिंग विभाग ने कोई अलग से हेल्पलाइन नंबर जारी नहीं किया है। सूचना देने के लिए सिर्फ संबंधित अधिकारियों के मोबाइल नंबरों का ही सहारा लेना पड़ता है। लेकिन कुछ महीने पहले जिले के सहायक माइनिंग अधिकारी रोहित साहू से संपर्क करने की कोशिश की गई, तो उनका फोन लगातार व्यस्त मिला।


