राजस्थान के बाड़मेर जिले में तृतीय श्रेणी टीचरों का स्थाईकरण 4 महीने से अटका हुआ है। पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने इस मुद्दे पर सरकार से सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि कांग्रेस सरकार के दौरान भर्ती हुए टीचरों का सितंबर 2025 में प्रोबेशन पूरा हो चुका है, इसके बावजूद 2000 से ज्यादा टीचरों का स्थाईकरण नहीं किया गया है। इसके चलते बाड़मेर के टीचरों को अब भी 70 प्रतिशत वेतन कटौती का सामना करना पड़ रहा है। गहलोत ने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा से इस मामले में आवश्यक कार्रवाई करने की मांग की है। 2022-23 में हुई थी 62 हजार टीचरों की भर्ती
कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में साल 2022-23 के दौरान 62 हजार तृतीय श्रेणी टीचरों की भर्ती की गई थी। इनमें से बाड़मेर जिले में 2000 से ज्यादा टीचरों को नियुक्ति दी गई थी। सरकार बदलने के बाद डॉक्यूमेंट्स की दोबारा जांच
सरकार बदलने के बाद मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में कांग्रेस सरकार में हुई भर्तियों के डाक्यूमेंट्स की जांच करवाई गई। इसमें टीचर भर्ती भी शामिल थी। बाड़मेर शिक्षा विभाग की ओर से पहले जांच की गई, इसके बाद जालोर की टीम से डाक्यूमेंट्स चेक करवाए गए। कुछ मामलों को संदिग्ध बताया गया, लेकिन एसओजी की ओर से अब तक संदिग्धों की कोई सूची जारी नहीं की गई है। सितंबर 2025 में पूरा हुआ प्रोबेशन
जांच प्रक्रिया के बीच सितंबर 2025 में बाड़मेर जिले के 2000 से ज्यादा तृतीय श्रेणी टीचरों का प्रोबेशन पीरियड पूरा हो गया, लेकिन इसके बाद भी स्थाईकरण की प्रक्रिया पूरी नहीं की गई। 1491 टीचरों के स्थाईकरण का आदेश हुआ रद्द
बाड़मेर जिले में फर्स्ट और सेकेंड लेवल टीचरों का प्रोबेशन पूरा होने पर शाला दर्पण पोर्टल के जरिए ऑनलाइन आवेदन मंगाए गए। कार्याध्यक्ष की ओर से सेवा संतोषजनक प्रमाण पत्र की अनुशंसा के आधार पर जिला स्थापना समिति जिला परिषद की बैठक 17 अक्टूबर को हुई। बैठक में 1491 कार्मिकों के स्थाईकरण का अनुमोदन किया गया और आदेश जारी हुए। इसके एक-दो घंटे बाद ही दूसरा आदेश जारी कर 17 अक्टूबर को ही स्थाईकरण को रद्द कर दिया गया। अशोक गहलोत का ट्वीट
पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने एक्स पर ट्वीट कर कहा कि बाड़मेर जिले के कई नवनियुक्त टीचरों ने जानकारी दी है कि करीब 2000 तृतीय श्रेणी टीचरों के साथ भेदभाव हो रहा है। कांग्रेस सरकार के दौरान रीट भर्ती परीक्षा से चयनित इन टीचरों का सितंबर 2025 में प्रोबेशन पूरा होने के बावजूद पिछले चार महीनों से स्थाईकरण अटका हुआ है। अन्य जिलों में प्रक्रिया पूरी, बाड़मेर में वेतन कटौती
गहलोत ने कहा कि प्रदेश के अन्य जिलों में स्थाईकरण की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है, लेकिन बाड़मेर के टीचरों को अब भी 70 प्रतिशत वेतन कटौती का सामना करना पड़ रहा है। इससे टीचर मानसिक तनाव में हैं। CM से कार्रवाई की मांग
पूर्व सीएम गहलोत ने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा से आग्रह किया कि बाड़मेर के टीचरों को उनका अधिकार और पूरा वेतन दिलाया जाए और इस मामले में तुरंत आवश्यक कार्रवाई कर न्याय सुनिश्चित किया जाए।


