गांव गाजीपुर में प्रीतिभोज के बाद मचा हड़कंप:दूषित पनीर खाने से फूड पॉइजनिंग, बुखार व उल्टी-दस्त से 90 लोगों की हालत बिगड़ी

क्षेत्र के गांव गाजीपुर में एक शादी समारोह दौरान दूषित पनीर सब्जी खाने पर फूड पॉइजनिंग होने से करीब 90 लोग बीमार हो गए। फूड पॉयजनिंग से करीब 90 लोगों को उल्टी-दस्त व बुखार होने की सूचना पर स्थानीय प्रशासन व चिकित्सा विभाग में हड़कंप मच गया। आनन-फानन में नदबई, लखनपुर व बरौली छार चिकित्सा टीम ने मौके पर पहुंच, मरीजों का उपचार किया। बाद में गंभीर स्थिति होने पर 18 लोगों को नदबई चिकित्सालय में भर्ती कराया। एसडीएम गंगाधर मीणा ने चिकित्सालय व नायब तहसीलदार जगवीर बेनीवाल ने गाजीपुर में पहुंच बीमार लोगों की कुशलक्षेम ली। शनिवार को गाजीपुर निवासी सुरेश प्रजापत के पुत्र सौरभ प्रजापत की शादी समारोह में प्रीतिभोज का आयोजन हुआ। जिसमें दूषित पनीर की सब्जी खाने के चलते ग्रामीण,फूड पॉयजनिंग के शिकार हो गए। एक साथ करीब 90 लोगों को उल्टी-दस्त की शिकायत पर नदबई, लखनपुर व बरौली छार से चिकित्सा टीम मौके पर पहुंची। मौके पर ही उपचार करना शुरु किया। बाद में 18 बीमार लोगों को गंभीर स्थिति में नदबई चिकित्सालय में भर्ती कराया गया। मामले में बीसीएमओ डॉ. राहुल कौशिक ने भी गाजीपुर में प्रतिभोज में फूड प्वाइजनिंग होने की सूचना पर चिकित्सा टीम मौके पर भेजते हुए मरीजों का उपचार के बारे में बताते सैम्पल जांच की प्रक्रिया फूड सेफ्टी टीम की बताई। जहां जगह मिली वहीं इलाज शुरू, 18 गंभीर घायल नदबई अस्पताल में भर्ती गाजीपुर में फूड पॉयजनिंग से करीब 90 लोगों को बीमार होने की सूचना पर चिकित्सा टीम मरीजों का उपचार करने पहुंची। लेकिन, ग्रामीण क्षेत्र में सीमित संसाधन होने व मरीजों की संख्या अधिक होने पर चिकित्साकर्मियों ने एक ही खाट पर दो मरीजों को लिटाकर पेड़ों पर ड्रिप टांगते हुए मरीजों का उपचार करना शुरु किया। साधारण बीमार को तो महज कुर्सी पर बैठाकर ही ड्रिप लगाई। इंतजार करती रही एम्बूलेंस गाजीपुर में फूड पॉयजनिंग से करीब 90 लोगों को बीमार होने की सूचना पर करीब आधा दर्जन एम्बुलेंस मौके पर खड़ी रहीं। मरीजों की संख्या बढ़ता देख, चिकित्साकर्मियों ने दवाईयों का स्टॉक ले जाने के लिए एम्बुलेंस चालक को कहा। लेकिन, 104 एम्बुलेंस के डीसी ने मना कर दिया। सेंपल जुटाने को नहीं पहुंची फूड सेफ्टी टीम चिकित्सा विभाग व प्रशासन की टीम ने मौके पर पहुंचते हुए मरीजों का उपचार तो किया। लेकिन, फूड सेफ्टी टीम के नही पहुंचने व दूषित भोजन के जांच सैम्पल नहीं लेने से एक बार फिर मामले में महज औपचारिकता होती दिखी।

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