गायन, नृत्य और संवाद के जरिए नारी शक्ति का बखान:नृत्य कार्यशाला की जेकेके में हुई शुरुआत, 20 मार्च तक प्रतिभागी सीखेंगे नृत्य के गुर

जवाहर कला केंद्र की ओर से अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर आयोजित वसुधा महोत्सव के अंतर्गत शुक्रवार को विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत संवाद प्रवाह के साथ हुई, ​जिसमें लोक गायिका उषा चौहान, कथक केंद्र की सचिव श्रुति मिश्रा और मूर्तिकार निर्मला कुलहरि ने विचार साझा किए। इसी के साथ डॉ. ज्योति भारती गोस्वमी के
निर्देशन में नृत्य कार्यशाला का आगाज हुआ। 20 मार्च तक चलने वाली कार्यशाला में 40 से अधिक प्रतिभागी हिस्सा ले रहे हैं। संगीत संध्या में रुचिरा केदार और आस्था गोस्वामी ने शास्त्रीय व उपशास्त्रीय गायन की प्रस्तुति दी गई। शनिवार को वसुधा के अंतर्गत प्रात: 11 बजे संवाद प्रवाह में रंगमंच से जुड़े वक्ता विचार प्रस्तुत करेंगे। सायं 4.30 बजे कलावर्त प्रेरणा श्रीमाली कथक केंद्र की सहभागिता में एकल कथक प्रस्तुति दी जाएगी। वहीं सायं 7 बजे अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस विशेष नाट्य प्रस्तुति ’30 डेज इन सितंबर’ का मंचन किया जाएगा। संवाद प्रवाह में विभिन्न क्षेत्रों में सफल महिलाओं ने प्रस्तुति किए विचार लोक गायिका उषा चौहान, कथक केंद्र की सचिव श्रुति मिश्रा और मूर्तिकार निर्मला कुलहरि ने ‘भारत की कला एवं संस्कृति और महिला कलाकारों की भूमिका व योगदान’, ‘एआई का प्रभाव और चुनौतियां’, ‘महिला कलाकारों की सामाजिक सुरक्षा’, ‘महिला कलाकारों की भूमिका, विवाह पूर्व और विवाह पश्चात’ विषयों पर अपने विचार प्रस्तुत किए।
श्रुति मिश्रा ने कथक के क्षेत्र में गुरु से कला सीखने के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि एआई हमें यह नहीं सिखा सकता कि कला को किस तरह मोड़ा जाए। इस क्षेत्र में पिछले कई सालों में कई नवाचार हुए हैं, और इन्हें इसी कला में पारंगत गुरुओं ने ही किया है। ऐसा कार्य किसी तकनीक या आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस द्वारा नहीं किया जा सकता।
वहीं, निर्मला कुलहरि ने महिला कलाकारों की सामाजिक सुरक्षा के संदर्भ में कहा कि नारी को स्वयं सशक्त होना होगा, साथ ही पुरुषों का भी यह फ़र्ज़ है कि वे महिलाओं को उनके लक्ष्य तक पहुँचने में सहयोग दें। इसके अलावा, महिलाओं के विवाह पूर्व और पश्चात अपने लक्ष्य को हासिल करने के संघर्ष में अंतर होता है। एक बेटी पिता के घर में स्वच्छंद होती है, वहीं विवाह के बाद वह ज़िम्मेदारियों से घिर जाती है, जिसके चलते उसके सपने कहीं पीछे छूट जाते हैं। ऐसे में, यदि जीवनसाथी व ससुराल पक्ष का सहयोग मिल जाए, तो उसके संघर्ष आसान हो सकते हैं। कार्यक्रम का संचालन रितु आचार्य ने किया। रुचिरा केदार और आस्था गोस्वामी ने शास्त्रीय और उपशास्त्रीय गायन की अद्भुत प्रस्तुति दी। अपनी रचनाओं में उन्होंने देवी सरस्वती, दुर्गा और राधा को नमन किया। कार्यक्रम की शुरुआत राग सरस्वती में निबद्ध “नमो नमो नमो देवी सरस्वती” से हुई, इसके बाद राग बसंत में पंडित दिनकर कैकिनी की रचना “कान्हा रंगवा ना डारो” को अद्धा ताल में प्रस्तुत किया गया, राग दुर्गा में बड़े रामदास जी की रचना “जय जय जय दुर्गे माता” गाकर दोनों कलाकारों ने शक्ति वंदन किया। वहीं, राधा रानी के भजन “कब तुम कृपा करोगी ऊंचे बरसाने वाली” ने दर्शकों को भक्ति रस में डुबो दिया। होली के रंग में रंगते हुए “नैन गुलाब से लाल बने है” (दीपचंदी ताल) और “आज खेलो श्याम संग होरी” (अद्धा ताल) प्रस्तुत किए गए। कार्यक्रम का समापन रसिया “रसिया को नार बनावोरी” से हुआ।

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