गार्ड बेटे की बदली रुकवाना चाहता था आरोपी , कहा था- सिविल अस्पताल में प्रबंध ठीक नहीं, कर्मियों की छंटाई करो

भास्कर न्यूज | अमृतसर थाना रामबाग पुलिस ने मंगलवार को एक नकली हेल्थ मिनिस्टर को गिरफ्तार किया। आरोपी की पहचान हरजीत सिंह निवासी गुरबख्श नगर के रूप में हुई है। आरोपी ने खुद को हेल्थ मिनिस्टर बताकर एसएमओ डॉ. रजनीश कुमार को कॉल की और कुछ स्टाफ सदस्यों को तुरंत नौकरी से हटाने के आदेश दिए। इसके साथ ही कई अन्य आदेश भी दिए। यह सब सुनकर एसएमओ पहले तो घबरा गए और कॉल काट दी। इसके बाद एसएमओ ने वापस कॉल की तो युवक ने हेल्थ मिनिस्टर के दफ्तर में होने का दावा करते हुए अपना नाम गुरजीत सिंह बताया। एसएमओ ने इस बारे में तुरंत सिविल सर्जन से बात की तो बात सेहत मंत्री तक पहुंची, जिसके पश्चात पुलिस कमिश्नर को इस मामले की जांच के आदेश दिए। पुलिस ने आरोपी हरजीत सिंह को उसके घर गुरबख्श नगर के काबू किया। आरोपी का बेटा सिविल अस्पताल में सिक्योरिटी गार्ड है और उसकी बदली कहीं और कर दी गई थी। बेटा वहीं नौकरी करे, इसलिए उसने एसएमओ को हेल्थ मिनिस्टर बनकर फोन कर दिया। इसके साथ ही उसकी पत्नी भी दर्जाचार कर्मचारी है। फिलहाल पुलिस ने आरोपी के खिलाफ केस दर्ज कर अगली कार्रवाई शुरू कर दी है। पहला मामला : मार्च 2024 में आरोपी ने कुलदीप सिंह निवासी झब्बाल रोड गुरुद्वारा साहिब आनंद विहार कॉलोनी से 8 लाख रुपए की ठगी की। आरोपी ने कुलदीप के बेटे को सिविल अस्पताल में एंबुलेंस ड्राइवर लगवाने के नाम पर ठगी की थी। इसमें आरोपी ने हवाला दिया कि उसकी अस्पताल के डाक्टरों के साथ अच्छी बनती है और नौकरी दिलवा सकता है। युवक ने 2024 की अलग-अलग तारीखों को पैसे दिए। मामला 10 जनवरी 2025 को थाना गेट हकीमां में दर्ज किया गया। दूसरा मामला : ऊषा हांडा निवासी न्यू शहीद ऊधम सिंह नगर की बेटी को सिविल अस्पताल में नौकरी दिलाने के नाम पर 5 लाख की ठगी की थी। जब उसने नौकरी नहीं दिलवाई तो उन्होंने पैसों की मांग की, जिसमें से 1.20 लाख रुपए वापस किए मगर बाकी नहीं।यह ठगी आरोपी ने फरवरी 2022 में की थी मगर मामला 19 जनवरी 2025 को थाना रामबाग में दर्ज किया गया। तीसरा मामला : मनजिंदर सिंह निवासी पंडोरी सिधवां तरनतारन के साथ 5.48 लाख रुपए की ठगी की थी। आरोपी ने मनजिंदर की पत्नी को सिविल अस्पताल में नौकरी दिलाने का झांसा दिया था। मनजिंदर की पत्नी ने जीएनएम का डिप्लोमा कर रखा था। युवक ने आरोपी को 2023 में अलग-अलग तारीखों में पैसे दिए थे, लेकिन एफआईआर 19 जनवरी 2025 को थाना रामबाग में दर्ज की गई। चौथा मामला : सुखचैन सिंह निवासी गांव पहलवाणके थाना भिखीविंड को सिविल अस्पताल में एंबुलेंस ड्राइवर लगवाने के नाम पर आरोपी ने 5 लाख की ठगी की। युवक साल 2021 में अलग-अलग तारीखों को पैसे दिए और थाना रामबाग की पुलिस ने मामला 26 सितंबर 2022 को दर्ज किया। पांचवां मामला : अमृतजोत सिंह निवासी गांव मालूवाल के साथ आरोपी ने उसकी बेटी को अस्पताल में क्लर्क की नौकरी दिलाने के नाम पर 8 लाख रुपए की ठगी की। यह पैसे अमृतजोन ने साल 2021 में अलग-अलग तरीखों को दिए। पुलिस ने 4 अक्तूबर 2022 को थाना रामबाग में केस दर्ज किया। छठा मामला : आरोपी के खिलाफ 30 अक्तूबर 2024 को थाना रामबाग में जेएमआईसी अंकिता गुप्ता की शिकायत पर भी धोखाधड़ी का केस दर्ज किया गया। थाना रामबाग की पुलिस की ओर से गिरफ्तार किया गया नकली हेल्थ मिनिस्टर सिविल अस्पताल में ही सुपरवाइजर की नौकरी करता रहा है। अब तक आरोपी करीब 6 लोेगों से लाखों रुपए की ठगी कर चुका है। यह ठगी सिविल अस्पताल में नौकरियां लगवाने के नाम पर ही की है। अभी तक आरोपी इन मामलों में जमानत पर ही बाहर चल रहा था और अलग-अलग अदालतों में केस चल रहे हैं। एक मामले में आरोपी ने अदालत के साथ ही धोखाधड़ी करने की कोशिश की। 30 अक्तूबर 2024 को थाना रामबाग में दर्ज धोखाधड़ी के एक केस में आरोपी ने 4 अक्तूबर 2022 को एंटीसेप्टरी बेल दायर की थी। ट्रायल कोर्ट या चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट अमृतसर के सामने 6 लाख का डिमांड ड्राफ्ट जमा करने का आदेश दिया गया। आरोपी ने बैंक से 6 लाख का डिमांड ड्राफ्ट बनवाया, लेकिन उसी दिन बैंक को यह कहते हुए इसे रद्द करवा दिया कि वह “खो गया” है। ड्राफ्ट रद्द होते ही 6 लाख रुपए उसके बचत खाते में वापस आ गई। बैंक रिकॉर्ड में ड्राफ्ट रद्द हो चुका था तो अदालत में जमा किया गया डिमांड ड्राफ्ट केवल एक कागज का टुकड़ा रह गया था। डीसीपी लॉ एंड अॉर्डर आलम विजय सिंह ने बताया कि सिविल अस्पताल में तैनात एसएमओ डॉ. रजनीश कुमार ने पुलिस को शिकायत दी कि मंगलवार सुबह 10.34 बजे एक कॉल आई। कॉल करने वाले ने खुद को हेल्थ मिनिस्टर बताया और कई आदेश दिए। शक होने पर सारी जानकारी सिविल सर्जन सतिंदर बजाज को दी। सिविल सर्जन ने तुरंत हेल्थ मिनिस्टर से बात की और उन्हें कॉल रिकॉर्डिंग भेजी। कॉल रिकॉर्डिंग सुनकर हेल्थ मिनिस्टर ने साफ कहा कि उनकी आवाज नहीं है। जिसके बाद पुलिस कमिश्नर गुरप्रीत सिंह औलख को सारी घटना के बारे बताया गया। एडीसीपी विशालजीत सिंह को जांच करने के आदेश दिए गए। जांच के दौरान आरोपी को उसके घर से ही गिरफ्तार कर लिया गया। डीसीपी लॉ एंड अॉर्डर ने बताया कि आरोपी के खिलाफ धोखाधड़ी के करीब पहले से 6 मामले दर्ज हैं जिसमें से 5 तो थाना रामबाग में ही हैं।

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