गीता महाकुंभ में हिन्दुओं के लिए अलग राष्ट्र की मांग:संतों ने बांग्लादेश-पाकिस्तान में हिन्दुओं पर हो रही हिंसा पर चिंता जताई

राजा पार्क स्थित श्रीराम मंदिर में चल रहे बगलामुखी महायज्ञ में गीता महाकुंभ का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के दौरान बांग्लादेश और पाकिस्तान में हिन्दुओं की स्थिति, लव जिहाद और सोशल मीडिया पर सामने आ रही हिंसा की तस्वीरों को लेकर वक्ताओं ने चिंता जताई। कार्यक्रम शिवशक्ति धाम डासना के पीठाधीश्वर और श्रीपंचदशनाम जूना अखाड़े के महामंडलेश्वर यति नरसिंहानंद गिरी के मार्गदर्शन और पूर्व विधायक ज्ञानदेव आहूजा की अध्यक्षता में हुआ। गीता महाकुंभ के मुख्य संयोजक पंडित विजय कौशिक और राजू बॉक्सर रहे, जबकि संचालन एडवोकेट चंद्रप्रकाश खेतानी ने किया। गीता महाकुंभ में बड़ी संख्या में संत, समाजसेवी और सनातन संगठनों से जुड़े लोग शामिल हुए। बांग्लादेश-पाकिस्तान के विभाजन की मांग
मुख्य वक्ता यति नरसिंहानंद गिरी ने कहा- योगेश्वर श्रीकृष्ण और श्रीमद्भगवद्गीता का ज्ञान सनातन धर्म का मूल आधार है। उन्होंने यह भी बताया कि समय के साथ गीता की अलग-अलग व्याख्याओं ने सनातन समाज को कर्म और धर्मयुद्ध के सिद्धांत से दूर किया। उनके अनुसार इसका असर हिन्दू समाज की मानसिकता और आत्मविश्वास पर पड़ा।
उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मांग की कि पाकिस्तान और बांग्लादेश में हिन्दुओं की सुरक्षा के लिए सेना भेजकर इन देशों का विभाजन कराया जाए और वहां हिन्दुओं के लिए अलग राष्ट्र बनाया जाए।
गौ, सनातन और हिंदुत्व पर फोकस
राष्ट्रीय हिंदू महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष पंडित विजय कौशिक ने कहा- देश को सुरक्षित रखने के लिए गौ, सनातन और हिंदुत्व की रक्षा जरूरी है। उन्होंने पाकिस्तान और बांग्लादेश में समय के साथ घटती हिन्दू आबादी का जिक्र किया और कहा कि ऐसी स्थितियों को रोकने के लिए कड़े कदम उठाने होंगे। उन्होंने शस्त्रधारण को लेकर भी अपनी बात रखी।
गीता महाकुंभ में यति सत्यदेवानंद, संत मंगल दास, संत गोपालशरण महाराज, संत भरतदास, संत रामबलकदास, संत जमदग्नि गिरि, साध्वी समदर्शी, संत गिरधर सहित बड़ी संख्या में संत और समाजसेवी मौजूद रहे।

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