सौर ऊर्जा से घरों को रोशन करने के मामले में मध्य प्रदेश अन्य राज्यों की तुलना में फिसड्डी साबित हो रहा है। केंद्र सरकार की पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना के राष्ट्रीय पोर्टल के मुताबिक, राजस्थान, गुजरात और महाराष्ट्र में लाखों घरों तक सौर ऊर्जा पहुंच चुकी है, लेकिन मप्र इसमें काफी पीछे है। देश में सोलर प्लांट के 57 लाख से ज्यादा आवेदन के बाद 22 लाख प्लांट इंस्टाल हो चुके हैं, जिनसे 27 लाख घरों को सौर ऊर्जा मिल रही है। इधर प्रदेश में मप्र पश्चिमी क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी में 40 लाख उपभोक्ताओं में से सिर्फ 44 हजार तक ही सोलर प्लांट पहुंचा है। 4 वजह… जिससे सौर ऊर्जा में पिछड़ा मप्र फिक्स चार्ज का डर: नेट मीटरिंग के बावजूद उपभोक्ताओं से हर महीने फिक्स चार्ज लिया जा रहा है, इससे लोग पूछते हैं “जब बिल जीरो नहीं होगा तो सोलर क्यों लगाएं?” रिटर्न का भरोसा नहीं: गुजरात व राजस्थान में सोलर निवेश 6-7 साल में निकल आता है, मप्र में यह 9-10 साल तक खिंच रहा है। बिलिंग सिस्टम जटिल: इम्पोर्ट–एक्सपोर्ट, कैरी फॉरवर्ड, एडजस्टमेंट जैसे फार्मूले आम उपभोक्ताओं को उलझा देते हैं। रेगुलेटरी दखल की कमी: चंडीगढ़ में गलत चार्ज पर रिफंड, राजस्थान में स्पष्ट नीति, मप्र में उपभोक्ता अब भी जवाब का इंतजार कर रहे हैं। मप्र पश्चिम कंपनी: 1 प्रतिशत तक ही पहुंचा सोलर


