गुदरई में जमीन विवाद, 2009 सीमांकन पर कब्जे की मांग:किसानों और प्रशासन के बीच दो घंटे चर्चा, अधिकारी बोले- पुराने नक्शों की जांच होगी

निवाड़ी जिले की ओरछा तहसील के गुदरई गांव में किसान 2009 के सीमांकन के अनुसार अपनी जमीन पर कब्जे की मांग कर रहे हैं। इस मामले को लेकर एसडीएम मनीषा जैन और एसडीओपी कृष्ण कुमार पांडेय ने किसानों के साथ लगभग दो घंटे तक चर्चा की। किसानों का कहना है कि उन्हें नक्शे के हिसाब से ही जमीन चाहिए, अन्यथा कोई समझौता स्वीकार्य नहीं होगा। प्रशासन ने किसानों को आश्वासन दिया है कि उनकी बंदोबस्ती के अनुसार जहां जमीन है, वह उन्हें दिलाई जाएगी। अधिकारियों ने जमीन की संपूर्ण जांच एक माह के भीतर पूरी करने का वादा किया है। प्रशासन ने किसानों को लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात रखने की सलाह दी है। अधिकारियों ने कहा कि वे इस पूरे मामले में हर संभव मदद के लिए तैयार हैं, लेकिन किसी भी स्थिति में उपद्रव बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। नक्शे के अनुसार ही मिले जमीन किसान देवकी कुशवाहा ने बताया कि उनकी 755 नंबर की जमीन है, जिस पर उनका साल 2000 से कब्जा है। उन्होंने जोर देकर कहा कि उन्हें उसी हिसाब से जमीन मिलनी चाहिए। देवकी कुशवाहा ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि नक्शे के अनुसार जमीन नहीं मिली, तो वे इसे किसी भी हाल में स्वीकार नहीं करेंगे। किसानों का कहना है कि इस मामले में पूरा गांव एकजुट है। एक महीने में विवाद निपटाने का दिया आश्वासन प्रशासनिक अधिकारियों ने किसानों को भरोसा दिलाया है कि पुराने नक्शों की जांच की जाएगी। नप्ती (माप) और कब्जा दिलाने की प्रक्रिया में लगभग 25 दिन का समय लगेगा। हालांकि, किसानों का कहना है कि प्रशासन ने एक माह से भी कम समय का आश्वासन दिया है, लेकिन उन्हें परिणाम नक्शे के अनुसार ही चाहिए। इसके अतिरिक्त, किसान देवकी कुशवाहा ने 30 लोगों पर दर्ज एफआईआर को रद्द करने की भी मांग उठाई है, जिससे स्थिति और संवेदनशील बनी हुई है।

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