27 दिसंबर 2023 को रात 8 बजे गुना जिले में सेमरी घाटी पर यात्रियों से भरी बस डंपर से टकरा गई थी। बस में आग लगी और 11 सवारियां मौके पर ही जल गईं। ड्राइवर समेत 2 अन्य ने अस्पताल पहुंचकर दम तोड़ दिया। सिकरवार ट्रैवल्स की बस क्रमांक MP08 P 0199 में 30 सवारियां थीं। बस के अंदर से जो 9 शव निकाले गए, उनमें से 7 एक-दूसरे से चिपके थे। इनको निकालने में लोगों के हाथ कांप गए थे। शवों को उठाने में अंग गिर रहे थे। वे ऐसे जले थे कि घरवाले तक नहीं पहचान पाए। तीन दिन में DNA रिपोर्ट आई, जिससे पता चल सका था कि हादसे में किस-किसकी मौत हुई। हादसे पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी दुख जताया था। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने जान गंवाने वालों के परिजन को 4-4 लाख रुपए और घायलों को 50-50 हजार रुपए सहायता राशि दी थी। कलेक्टर-एसपी से लेकर ट्रांसपोर्ट कमिश्नर तक बदल दिए गए। तमाम कानूनी कार्रवाई के बाद बस मालिक को जेल हुई लेकिन वह 17 दिन के भीतर ही जमानत पर बाहर आ गया। हादसे को आज एक साल पूरा हो गया है लेकिन पीड़ितों के घाव अब भी हरे हैं। उनकी आंखों के सामने से वो दर्दनाक मंजर हटता ही नहीं है। दैनिक भास्कर ऐसे ही तीन परिवारों तक पहुंचा, जिनके अपनों की जान इस हादसे में चली गई थी। पढ़िए रिपोर्ट… पहले हादसे से जुड़ी दो तस्वीरें देख लीजिए… वे 11 यात्री, जो मौके पर ही जलकर राख हो गए थे… अब उनकी बात, जिनके हिस्से केवल आंसू आए… पिता गुमसुम रहते हैं, मां याद आते ही रो पड़ती हैं
दैनिक भास्कर की टीम बस हादसे में मारे गए गणेश गिरी के घर पहुंची। यहां सन्नाटा था। पड़ोसी से बात की तो उन्होंने बताया- गणेश के पिता बाजार गए हैं। छोटे भाई की बाजार में एक दुकान है, आप वहां चले जाइए। इसके बाद टीम दुकान पहुंची। गणेश के छोटे भाई आदित्य गिरी ने बताया- उस हादसे के बाद मेरा पूरा परिवार सदमे में रहा। उनके जाने के बाद कुछ दिन तक तो समझ ही नहीं आया कि अब क्या और कैसे होगा? जो चार लाख मुआवजे के मिले, वो भी आखिर कब तक चलते। पांच महीने बाद जैसे-तैसे मानसिक हालत ठीक हुई। इसके बाद मैंने बैंक का यह कियोस्क खोला है। इसी से दिन भर में थोड़ी-बहुत कमाई हो जाती है। घर का खर्च चल रहा है। परिवार ने अब मेरी शादी तय कर दी है। 20 फरवरी को फंक्शन है, घर में तैयारियां चल रही हैं। पटवारी के परिजन को अब तक अनुकंपा नियुक्ति नहीं
हादसे में जिनकी मौत हुई, उनमें पटवारी मुस्तकीम खान भी शामिल थे। भास्कर टीम उनके घर पहुंची तो मुस्तकीम के चचेरे भाई हकीम खान से मुलाकात हुई। हकीम ने बताया- भाई के परिवार में उनकी पत्नी और 15 महीने का बेटा है। बच्चे को तो कभी पता ही नहीं चलेगा कि उसके पापा कैसे दिखते थे? हादसे के बाद से भाभी बिल्कुल खामोश रहती हैं, किसी से बात तक नहीं करती। हम लोग कुछ मदद कर देते हैं, जिसके कारण उनका खर्च चल जाता है, लेकिन आखिर हम भी कब तक मदद कर पाएंगे? शासन को उनके बारे में कुछ सोचना चाहिए। बच्चा बड़ा होगा तो उसकी पढ़ाई भी करानी है। समझ नहीं आता कैसे सब हो पाएगा? रिश्तेदार कर रहे मदद, अब तक कोई क्लेम नहीं मिला
एक अन्य मृतक महेश सिलावट के भतीजे सोनू सिलावट ने बताया कि उनके चाचा घर में अकेले कमाने वाले थे। परिवार में उनकी पत्नी और तीन बच्चे हैं, जो पढ़ाई कर रहे हैं। चाचा के जाने के बाद परिवार पूरी तरह टूट गया है। चाची गुमसुम रहती हैं। हम लोग किसी तरह मदद कर रहे हैं, जिसके कारण उनके घर का खर्च चल पा रहा है। अब तक कोई क्लेम नहीं मिला है। हमने कई बार जनसुनवाई में आवेदन भी दिया, लेकिन अभी तक कोई हल नहीं निकला। जनवरी में भी इसी बस से हुआ था बाइक का एक्सीडेंट
पड़ताल के दौरान दैनिक भास्कर को आरोन कोर्ट का एक आदेश मिला था। इससे खुलासा हुआ कि 17 मार्च 2023 को भी इस बस ने एक बाइक को टक्कर मारी थी। तब कोर्ट ने आदेश दिया था कि 15 दिन में बस का बीमा करा लें। हालांकि, बस मालिक ने बीमा नहीं करवाया। दरअसल, आशाराम अहिरवार पिता सोम सिंह अहिरवार (45) निवासी छोटापुरा आरोन ने 17 मार्च को थाने में शिकायत की थी। उसने बताया था कि रात करीब 9 बजे वह कमल बाथम की बाइक से भतीजी के जन्मदिन में जा रहे थे। दोस्त शिवनारायण ओझा के साथ बेटा रवि अहिरवार उनकी बाइक पर था। इसी दौरान बस क्रमांक एमपी 08 पी 0199 ने शिवनारायण की बाइक को टक्कर मार दी। रवि और शिवनारायण को चोटें आई थीं। पुलिस ने मामला दर्ज कर बस को जब्त कर लिया था। कोर्ट ने बीमा कराने की शर्त पर छोड़ी थी बस
बस मालिक भानु प्रताप सिकरवार ने थाने से बस को छुड़वाने के लिए कोर्ट में आवेदन दिया। कोर्ट में यह सामने आया कि बस का बीमा नहीं था। कोर्ट ने आदेश दिया कि 10 लाख का सुपुर्दगीनामा और इतनी ही राशि की जमानत पेश करने पर बस को रिलीज किया जाएगा। साथ ही यह शर्त भी जोड़ी थी कि आदेश के 15 दिन में बस का बीमा करा लिया जाए। हालांकि, दस महीने में भी मालिक ने बस का बीमा नहीं कराया और बस से दोबारा हादसा हो गया। मामले से जुड़ी ये खबरें भी पढ़ें… गुना हादसे में ट्रांसपोर्ट कमिश्नर, कलेक्टर-SP को हटाया गुना बस हादसे में मध्यप्रदेश सरकार ने बड़ी कार्रवाई की है। गुना कलेक्टर तरुण राठी और एसपी विजय कुमार खत्री के साथ ही परिवहन आयुक्त संजय कुमार झा को हटा दिया है। कलेक्टर का अतिरिक्त प्रभार जिला पंचायत सीईओ प्रथम कौशिक को सौंपा गया है। RTO रवि बरेलिया को सस्पेंड कर दिया गया है। फायर ब्रिगेड देर से पहुंचने के कारण चीफ म्युनिसिपल ऑफिसर बीडी कतरोलिया को भी सस्पेंड कर दिया गया है। पढ़ें पूरी खबर… जिस बस में लोग जिंदा जले, उसका नंबर फर्जी था MP08 P 0199 यह उस बस का नंबर है, जिसमें एक महीने पहले 13 लोग जिंदा जल गए थे। भास्कर की पड़ताल में खुलासा हुआ था कि यह बस फर्जी नंबर से चल रही थी। MP08 P 0199 नंबर के रजिस्ट्रेशन पर जो चेसिस नंबर है, वह किसी दूसरी गाड़ी का है। हादसे के बाद थाने पर खड़ी गाड़ी का चेसिस नंबर अलग है। पूरी खबर पढ़ें… घायल ने कहा था- हादसा कराया गया
बस में आरोन की रहने वाली 5 महिलाएं भी थीं। ये सभी मारपीट के केस में गुना जेल में बंद थीं। जमानत मिलने पर लौट रही थीं। उन्हीं में से एक महिला विनीता ओझा ने कहा था कि कुछ दिन पहले परिवार का पड़ोसियों से जमीन को लेकर झगड़ा हो गया था। विनीता ने आरोप लगाया था कि हादसा जानबूझकर कराया गया। पूरी खबर पढ़ें…


